कुंजी - कही खो गयी है
Posted on अप्रैल 29th, 2004 द्वारा ब्रिज
श्क्ती जो चेतन थी
अब जड़ हो गयी है |
बचपन मे जो कुंजी मेरे पास थी,
उम्र् बढ़ते-बढ़ते
वह कही खो गयी है |
- दिनकर
Thanks to Pankaj, I have taken a small step in hopefully a long march to home.
Filed under: मटरगश्ती

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 



