भारत-अमरीका आदान-प्रदान
Posted on जून 19th, 2004 द्वारा संजय
लो भई, पंकजजी और अतुलजी जहाँ भारत आने की सोच रहें है वहीं हम दो महीनों के लिये टेक्सास और सैन फ्रेंसिस्को जाने की त्य्यारी में हैं। आशा थी की पंकजजी जो सैन फ्रेंसिस्को के करीब हैं, उनसे मुलाकात हो जाती। खैर फिर कभी।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




यह भी खूब रही।
आते जाते कोई मनीला रुक रहा है तो बताए!