कुंभकोणम के स्कूल की आग और कुछ प्रश्न

आज सुबह उठते ही कुंभकोणम के स्कूल में लगी आग से मृत बच्चों की उदास खबर पढ़ी। बच्चों के माँ-बाप की व्यथा के बारे में सोचकर डर लगता है। प्रशासन का तो वही घिसा पिटा रुख है

राज्य की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने इस हादसे के लिए स्कूल प्रशासन और शिक्षा संस्थानों को क़सूरवार ठहराते हुए उनपर लापरवाही का आरोप लगाया है.
उन्होंने घटनास्थल का जायज़ा लेने के बाद हादसे की जाँच के आदेश दिए.
उन्होंने इस स्कूल का लाइसेंस रद्द कर दिया और साथ ही कुछ अधिकारियों को लापरवाही के लिए निलंबित भी कर दिया.

जैसे कि अधिकारियों को निलंबित करना समाधान है। देस में कुछ बातें कितनी मुश्किल हैं सोचते हुए कुछ प्रश्न दिमाग में आए

  • ऐसा न हो इसलिए सार्वजनिक इमारतों के लिए कुछ नियम होते हैं जिसे कि आप को किसी सरकारी महकमे से पास कराना होता है।
  • जैसे ही सरकारी महकमा आया आप मान सकते हैं कि सरकारी मुलाजिम के हाथ में शक्ति आ गई जोकि बिना पत्रम्-पुश्पम् के बिना नहीं मानेगी।
  • अब कुछ लोगों को जरा जल्दी होती है और कुछ एक सोचते हैं कि नियम उन के लिए नहीं हैं। तो ये लोग सुविधा शुल्क दे कर काम करवाना चाहेंगे। तो सरकारी बाबू ईमानदार हो भी तब भी उसे दाम अथवा दण्ड से मनाने की कोशिश की जाएगी
  • यह सब सोचते हुए लगता है कि क्या यह स्थिति कभी सुधरेगी?

One Response to “कुंभकोणम के स्कूल की आग और कुछ प्रश्न”

  1. आपने एक बहुत ही गंभीर प्रश्न उठाया है, जिसके लिये आप बधाई के हकदार हैं। वास्तव में भारत में यह एक त्रासदी ही है कि इस प्रकार के लियमों का कोई पालन नहीं करता।

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