क्यूँ हो गया ना…
काफी मेहनत और विभिन्न प्रयासों के बात आखिर अक्षरग्राम को वर्डप्रैस में लाने में सफल हो ही गया। आप सभी को पासवर्ड वगैरह भेज दिए हैं यदि कुछ कठिनाई आए तो लिखिएगा। यदि कोई भद्रजन इस परिवर्तन से आए बदलाव की अच्छाईयों बुराईयों की समीक्षा कर सके तो बहुत बढिया होगा। क्यूँकि हम तो कुछ नहीं कह सकते। अपनी पंजाबी में एक कहावत है ” अपनी माँ नूँ कोई डायन नहीं कैंदा”। साथ ही अगर किसी के पास ब्लागडिग्गर वाली हिन्दी चिट्ठों की xml फाईल पड़ी हो तो भेजने की कृपा करे । ब्लागडिग्गर को पता नहीं क्या हुआ है, जिस वजह से चिट्ठा विश्व की भी लगी पड़ी है। कोई नहीं ये तो चलता ही रहता है।
कल रात को टीवी पर मनमोहन सिंह का चार्ली रोज़ से वार्तालाप आ रहा था। वार्तालाप में भारत पाक दोंनो के आणविक शक्ति होते हुए और हर समय तनाव के माहौल के बारे में सिंह साहब का जवाब सुन कर बड़ा मजा आया - जवाब था कि भारत एक जिम्मेवार आणविक शक्ति है और इसका आणविक पदार्थों के आयात निर्यात पर कड़ा नियंत्रण है।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




वाह पंकज बाबू,नया रंग,नया रूप,नया अंदाज बढिया है(खराब कहने की किसकी हिम्मतहै?).
सिंह साहब कह सकते थे कि स्थिति तनावपूर्ण किंतु नियंत्रण मे है.किसकेनियंत्रण मे है यह कौन पूछता?
रंग रूप के अलावा मेरा अभीप्राय ये भी था कि - प्रयोग करने मे कैसा है, लोग बाग आसानी से काम कर लेते हैं या प्रश्न रहते हैं कि ये काम कैसे होगा और ये काम कैसे होगा। फुरसतिया बाबू को कुछ कठिनाई आ रही थी - उनकी कल्पवृक्ष प्रविष्टि तो जैसे गुम ही हो गई। आशा है कि अब सब ठीक है।
Xenical.
Xenical.
bet mazier sarl
terrier seedy confederacy