हिन्दी चिट्ठों में एक नया पन्ना
चिट्ठाकारों के गूगल ग्रुप पर आई ईमेल से जितेन्द्र चौधरी के “मेरा पन्ना” चिट्ठे के बारे में पता चला। लीजिए भैया जी अब कुवैत भी हिन्दी ब्लॉगजगत के नक्शे पर आ गया। आलोक जी तो मनीला में हैं हीं चाहे थोड़े समय के लिए ही। जितेन्द्र की कलम से उनके बारे में उनकी ब्लॉगर प्रोफाइल से
जन्म से कानपुरी, लेकिन रोटी के लिये मिट्टी से दूर,Database और VB के डाक्टर, Internet के लती, खाना छोड़ सकते है Surfing नही.लेखन मे उग्र.,राजनेताओ से खासी चिढ,भारत की सामाजिक एवम राजनैतिक दुर्दशा से व्यथित.आजकल कुवैत मे डेरा है, यही पर बसेरा है.अक्सर Middle East और यूरोप के बीच चक्कर लगाते हुए पाये जाते है,क्या करे रोजी रोटी का सवाल है. —–सपनाः हिन्दी इन्टरनेट की आधिकारिक भाषा बने.—— —–पसन्दः राजनीतिक चर्चा—— —–नापसन्दःनहाने के बाद,पत्नी द्वारा,बाथरूम मे वाइपर लगाने को बाध्य किया जाना—–
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




जब से चौधरी साहिब कुवैत वाले जी का पता चला है, उन्हीं के पन्ने पढ़ रहे ह […]
चौधरी जी का पन्ना-सबका पन्ना.धुंआधार बैटिंग का अंदाज.देरी हुई जो शुरु करने में वो पूरी हो गयी- पहले ही माह.वाह भाई वाह .
सबसे पहले तो मै अपने सभी साथियो का धन्यवाद करना चाहता हूँ, जो उन्होने मेरा चिट्ठा पढा, दरअसल नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है, इसलिये मेरे को भी हर रोज हाथो मे खुजली होने लगती है, चिट्ठा लिखने की… और मै लग जाता हूँ, अपने काम पर.
लेकिन शायद मै ज्यादा दिन तक न लिख सकूँ, जब तक कुवैत मै हूँ, तब तक तो लिखूंगा ही.अब आपके लिये अच्छी या बुरी खबर यह है कि अभी कुछ और हफ्ते तक मेरा कोई टूर का प्रोग्राम नही है, सो तब तो मुझे झेलिये.
और हाँ, मुझे अच्छा लगेगा, यदि कोई महानुभाव मेरे लेखो का पोस्टमार्टम कर सके और मेरी गलतियो को पर मेरा ध्यान आकर्षित कर सकें.