सत्येश भंड़ारी की कविताएँ
Posted on अक्तूबर 20th, 2004 द्वारा पंकज
भाई कविता और छपास की पीड़ा साथ साथ चलती हैं। पहले लोग बाग अपनी कविताओं से दोस्तों को पकाया करते थे अब इंटरनेट से दुनिया के कोने कोने में पहुँच रहे हैं तो लीजिए जनाब आज आप के लिए खास गूगल से खोजी गई सत्येश भंड़ारी का कविता संग्रह प्रस्तुत करते हैं। जरा नीचे वाली कड़ी पर क्लिक कीजिएगा
Filed under: मटरगश्ती

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




धन्यवाद पंकजजी,
एक शानदार लिंक के लिये
सत्येशजी की कविताये, सचमुच कमाल की हैं……
अभी एक दो ही देखी है, आज ही कुछ और निपटा लूंगा.
-जीतेन्द्र चौधरी
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