अक्षरग्राम अनुगूँज
संचार के विविध माध्यमों से हमें हर रोज़ ढेरों सूचना प्रप्त होती है। इस सूचना और हमारे आसपास की घटनाओं से हमारी राय बनती है। ज़ाहिर है मुक्तलिफ़ राय; हर राय के पीछे अपने वज़हात। राय जो आपकी मौज़ुदा मनःस्थिति, स्थान और आपके अपने खास व्यक्तित्व और सोच के प्रभाव से बनाती है आपकी विशिष्ट पहचान। राय जो कई दफा तो दिखाती है समाज को आईना और कई बार पेश करती है मुद्दे का कोई अनसोचा पहलू।
जनतंत्र में विचारों के व्यक्त करने की आज़ादी होनी चाहिए, कम से कम जाल पर ऐसी स्थिति तो है। अक्सर जो हम सोचते हैं उस पर मतैक्य या मतान्तर होता ही रहता है। अक्षरग्राम के सौजन्य से ऐसा ही प्रयास हम करने जा रहे हैं, (पंकज को बहुत बहुत धन्यवाद सहमति देने के लिए) जहाँ हर पखवाड़े हम मिल कर पेश करेंगे किसी एक ही मुद्दे पर विभिन्न चिट्ठाकारों के मतों की “अनुगूँज”।
अनुगूँज की मेज़बानी हर बार अलग अलग चिट्ठाकार करेंगे, विषय का निर्धारण भी वही करेंगे। “अनुगूँज” के आयोजन की तारीख होगी हर माह की १ से ६ और १५ से २० तारीख के मध्य, वास्तविक तारीख मेज़बान अक्षरग्राम और गुगल ग्रुप्स के जरिए आयोजन के हफ्ते भर पहले दे सकेंगे। कुछ नियम (जिन में आपके सुझावों के आधार पर रद्दोबदल होते रहेंगे)
- मेज़बान बारी बारी “अनुगूँज” का आयोजन करेंगे। अच्छा हो कि चिट्ठाकार मित्र किसी नियत तिथि के आयोजन का जिम्मा ले लेवें। “अनुगूँज” का आयोजन कैंलेंडर स्वतः ही तैयार होता जाएगा (अनुगूँज आयोजनावली नीचे देखें)।
- विषय और सही तिथि की घोषणा मेज़बान ही करेंगे, याद रहे कि मूल उद्देश्य यही है कि एक ही दिन पर भाग लेने वाले चिट्ठाकार दिए गए विषय पर एक चिट्ठा लिखें। मेज़बान की एक ज़िम्मेवारी और होगी, अक्षरग्राम पर आयोजन के दिन सभी भाग लेने वालों चिट्ठों का ज़िक्र करता एक अवलोकनी चिट्ठा लिखना।
- अनुगूँज के आयोजन की घोषणा वाले चिट्ठे के साथ अनुगूँज के नियमों के लिए इस चिट्ठे, जिसकी स्थाई कड़ी हैः http://akshargram.com/2004/10/24/88/ का उल्लेख अवश्य करें। अवलोकनी चिट्ठे को लिखने के पश्चात संभव हो तो http://akshargram.com/2004/10/24/88/trackback/ कड़ी पर एक ट्रेकबैक पिंग भेजें।
जो चिट्ठाकार किसी “अनुगूँज” में भाग लेना चाहते हों तो उन्हें बस इतना करना है:
- चिट्ठा लिख कर मेज़बान को चिट्ठे की स्थाई कड़ी (पर्मालिंक) ईमेल कर दें या फिर आयोजन की घोषणा पर टिप्पणी (कॉमेंट) के रूप में सूचित कर दें।
- आयोजन तिथि के दिन अपनी प्रविष्टि अपने ही ब्लॉग पर प्रकाशित करें
- प्रविष्टि दिए गए विषय पर ही होनी चाहिए
- प्रविष्टी के साथ “अनुगूँज” का लोगो होना चाहिए तथा “अनुगूँज” का आयोजन क्रमाँक भी (उदाहरणः अनुगूँज : पहला आयोजन)। लोगो लगाने के लिए निम्न HTML का प्रयोग करें
<img xsrc="http://pnarula.com/images/akshargram/anugunj.jpg" mce_src="http://pnarula.com/images/akshargram/anugunj.jpg" alt="Akshargram Anugunj" align="right" hspace="5" vspace="5" />
अब आप कहेंगे कि ये तो किसी स्कूली निबंध प्रतियोगिता जैसा हो गया। मैं कहुँगा गलत, वो तो फिर भी आसान हुआ करता था, विषयों के चुनाव होते थे, यहाँ तो वह भी नहीं। कठिन है न? पर जिंदगी क्या हमेशा आसान होती है! तो स्वीकारिए यह चुनौती और कमर कस लीजिए पहले आयोजन के लिए, अभी काफी समय है। हमारी शुभकामनाएँ! आशा है आपकी उर्जा हिन्दी चिट्ठाकारी को भी लाभान्वित करेगी।
अनुगूँज आयोजनावली:
- पहला आयोजन, मेज़बान नीरव (१ नवंबर, २००४)
- दूसरा आयोजन, मेज़बान पंकज (१५ नवंबर, २००४)
- तीसरा आयोजन, मेज़बान देबाशीष (१ दिसंबर, २००४)
- चौथा आयोजन, मेज़बान अतुल (१५ दिसंबर, २००४)
- पाँचवा आयोजन, मेज़बान जीतेन्द्र (१ जनवरी, २००५)
यदि आप अनुगूँज आयोजित करना चाहते हैं तो चिट्ठाकार गूगल ग्रुप्स पर या मुझे (debashish at gmail dot com) लिखें।
Filed under: अनुगूँज

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




Does this mean that on a given subject, there may be ‘n’ number of blog entries on different blogs and Akhargram will have their links on each such post? This way, there will be a common place to anounce/display a subject and links and probably a lot of people will look forward to such posts.
That’s right Atul. It’s very similar to the Blog Mela concept except that we specify beforehand the topic on which everybody will write. Diverse opinion set on a single topic, hope it would be interesting
Please count me in for any forthcoming Anugunj aayojan.
Hey guys, I need help. How do I read this blog in Hindi on my browser(Firefox)? It shows only weird characters… I can read and write Hindi..
Why can’t I see the Hindi section?
[…] ो चिपकाना न भूलें। अनुगूँज के नियम यहाँ देखें। अपडेट २२ फरवरी २००५: अभी त […]
[…] ो चिपकाना न भूलें। अनुगूँज के नियम यहाँ देखें। This entry was posted by इंद्र […]
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[…] अनुगूँज अब चिट्ठाकार बढ रहे थे, इसलिए सबको विभिन्न विषयों पर आवाज बुलन्द कराने के लिए अनुगूँज का आयोजन किया गया। २४ अक्टुबर २००४ को अनुगूँज की शुरुवात हुई। इस बारे में ज्यादा जानकारी यहाँ पर देखिए। […]
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