बुनो कहानी
आप में से कई बुनो कहानी के बारे में जानते ही होंगे। यह कीड़ा मेरे दिमाग में तकरीबन ६ महीने पहले कुलबुलाया था, जब मैं इन्दौर में था। गौरव से बात भी हुई और फिर आई गई भी हो गई। जब अनुगूँज की मेज़बानी का मौका मिला तब भी सोच कर रह गया। फिर जैसे जितेन्द्र ने मन की बात पढ़ ली और विचार बन ही गया। बुनो कहानी उन सभी चिट्ठाकारों के लिए एक नया शगल होगा जो या तो इस गुमान में हैं कि वे लेखक बनने का माद्दा रखते थे (मौका नहीं मिला वरना ज्ञानपीठ कौन सी बड़ी तोप है), बंदा भी उसी श्रेणी में शुमार है, या ऐसे ब्लॉगर जो वाकई होनहार लेखक हैं (आप पीछे मुड़ कर किसे देख रहे हैं अतुल भाई, आप ही की बात हो रही है) या फिर वो जिनके भीतर उबलते दूध कि नाई सृजन करने की चाह उफान मार रही है। तो बंधुवर तकाज़ा यही है कि गैस बंद न की जाए, मेरा मतबल है की सृजन के बैलों को खोल कर सरपट दौड़ने दिया जाए यार! जगहंसाई हो तो हो, मन को तो ठंड पै जाएगी। क्योंजी पंकजजी, है न नेक विचार?
तो इस बुनो कहानी के आइडिया को न्यू ईयर पर हल्दीराम के सोन हलवे का पैकेट समझ कर ग्रहण करें और नोश फरमाए जितेन्द्र के द्वारा शुरू की गई कहानी का (वैधानिक चेतावनीः इस कहानी को आत्मकथा न समझा जाए)। कहानी का शीर्षक तो फिलहाल मैंने ही दे दिया पर जैसे जैसे कहानी बढ़ी, बदलता रहेगा। देखते हैं किसकी कलम पहले मचलती है। यदि आप भी योगदान करना चाहे तो मुझे लिखें।
सभी पाठकों और साथियों तथा उनके परिवार को नव वर्ष की शूभकामनाएँ। नए साल में अनुगूँज का छठा आयोजन पहली बार एक गैर हिन्दी लेखक रोहित करने जा रहे हैं। २००५ में हिन्दी को और मान मिले यही आशा है।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




“बुनो कहानी” की पहली कहानी का पहला अध्याय पढ़ कर मज़ा आ गया। लेखकों की कतार फुल लग रही है। अगली कहानी के लिए हम अपनी एडवान्स अर्ज़ी दे रहे हैं। हो सके तो मुझे भी अवसर दिया जाय। धन्यवाद।
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