एक नया बल्ब जला
Posted on जनवरी 25th, 2005 द्वारा पंकज
आज किसी नील जी ने हाँ भाई पर टिप्पणी में हिन्दी IME के बारे में पूछा तो उनसे ईमेल व्यवहार शुरु हो गया। बातों बातों में एक बात निकली जो कि मुझे हिन्दी लिखने के लिए एक बढ़िया कारगर तरीका लगी। यदि इंटरनेट एक्सपलोरर व फायरफॉक्स के लिए ऐसा प्लगईन लिखा जा सके कि जो हिन्दी लिखने की सुविधा सीधे ब्राउज़र में ही दे दे तो क्या बढ़िया हो। क्या कहते हैं गाँववाले। है कोई जान पहचान का जो कि यह काम कर सके।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




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Ek suvidhaasampanna devnaagari editor kee poorti hindee chitthaakaree men kranti laa degee.
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