कुछ तो कहो
Posted on जनवरी 25th, 2005 द्वारा जीतेन्द्र
आप सभी ने मेरी आवाज तो सुन ही ली होगी.
अब समय आ गया है आप सभी लोगो को अपनी अपनी आवाज सुनाने का.
क्योंकि बोर होने का एक्सक्लियूसिव ठेका सिर्फ आपका नही है, हम भी है राहों मे.
आप सभी से निवेदन है कि कृप्या करके मेरे गजलो वाले सेक्शन मे से या फिर अपनी पसन्द की किसी एक गजल को अपनी आवाज मे रिकार्ड करें. आउटपुट फाइल MP3 फारमेट मे होनी चाहिये. फाइल बनते ही मेरे को बतायें, ताकि मै आपको अपलोड करने का यूजरनेम और पासवर्ड भेज सकूँ.
इसी बहाने आपकी आवाज का आडिशन भी हो जायेगा. सबसे अच्छी आवाज वाले बन्धु को सारी गजले गाने का ठेका दिया जायेगा.
है ना मजेदार बात…..तो देर किस बात की है…शुरु हो जाइये.
Filed under: खिंचाई

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




आवाज सुनी आज .पर वह तो केवल पहला पैरा था.पूरा ब्लाग तो नही.बहरहाल और पूरा ब्लाग भेजो कभी जब फोकट का इन्तजाम हो जाये.
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