जय राम जी की

पंकज जी का शुक्रिया गाँव के चौपाल पर हुक्का गुड़गुड़ाने का मौका देने का। अब हुक्का तो अपना ही रहेगा पर तमाखू माँगता रहूँगा भाइयों, क्यों क्या खयाल है। अरे हाँ वो क्या कहते हैं मिर्ची सेठ और आलोक भाई ने पूछा था प्रारंभ के छात्रों की हिन्दी में मीन मेख के बारे में, हाँ तो खिंचाई कीजिए जरूर लेकिन देखियेगा घोड़ी बिदक न जाये, डराइयेगा मत छात्रों को और जहाँ तक हो सके सरल हिन्दी के माध्यम से ही, “हस्त-प्रक्षालन” की तरह नहीं :) क्या पता कल इन्हीं में से एक और मार्क टली पैदा हो जाये।

2 Responses to “जय राम जी की”

  1. ठाकुर सा थारो स्वागत हैं।

  2. bp credit cards

    Lloyd slacking Hippocrates.pickups overflow!

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