चिट्ठाजगत की पहली ब्लागजीन
बहुप्रतीक्षित निरंतर को प्रकाशित देखकर मन खुश हो गया .वाह, खूबसूरत , सुभानअल्लाह जैसे शब्द अपर्याप्त लग रहे हैं.सरसरी नजर से लगभग पूरी पत्रिका पढ गया मैं.पहला अंक इतना मुकम्मल है,आगे तो और सुधार होंगे.पत्रिका और बेहतर,लोकप्रिय होगी—मेरा यह विश्वास है.
हिन्दी चिट्ठाकारों के आपसी समझ,सहयोग,बंधुत्व भाव की कहानी कहती है यह चिट्ठाजगत की पहली ब्लागजीन.पंकज,देवाशीष ,अतुल,जीतेन्द्र,रवि ,रमन बधाई के पात्र हैं पत्रिका को इततना खूबसूरत कलेवर देने के लिये.बाकी चिट्ठाकार अगले अंकों में आयेंगे आगे स्वत:स्फूर्त सहयोग के साथ.
देवाशीष ने जो मेहनत की इस पत्रिका के प्रकाशन मे उनको देखते हुये पंचायत उनके सारे पुराने पाप ,जिनमें लंबे समय तक कुछ न लिखना भी शामिल है,माफ करती है.जीतेन्दर भी उचल-कूद लगातार मचाये रहे पत्रिका के प्रकाशन के लिये.
यह बताया जाये कि अगर कोई टिप्पणी लिखना चाहे तो कैसे लिखना होगा निरंतर में?
फिर से एक बार सबको बधाई.तैयारी करें अगले अंक की.
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 



