कहानी बसंत की

अरे चौंकिए मत। मैं यहाँ कोई मौसम की कथा नहीं सुनाने जा रहा। चाहूँ भी तो भी मौसम मेरे दिमाग के दायरे से बाहिर है और आलस के मारे रिसर्च नहीं करूँगा। तो फिर यह कौन सा बसंत है? जनाब बसंत नाम है मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग हाँ भाई के नए अभिकल्प का (रमण जी थीम के लिए इतना बढ़िया नाम सुझाने के लिए शुक्रिया हम तो नमूनों और खाकों में ही फंसे थे)। यहाँ मैं वर्डप्रैस के लिए अभिकल्प कैसे बनाएं के बारे में बसंत का उदाहरण लेकर लिखूँगा। यह लेख होली की वजह से केवल रंगों तक सीमित है।

अभिकल्प बनाना किसी सजाल को बनाने के समान ही है। और मोटे तौर पर सोचें तो अभिकल्प के लिए रंगो का चुनाव कुछ कुछ ऐसा ही है कि जैसे आप अपने घर के लिए रंगो का चुनाव करते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रेरणा स्त्रोत के रुप में बेहर रंग बनाने वाली कम्पनी के विभिन्न रंगो को कमरे इत्यादि में कैसे प्रयोग करें के नमूनो को देखा। आप भी नीचे दी गई कड़ी से इन नमूनों को देख सकते हैं, कड़ी पर क्लिक करके दाँयी ओर Inspiration Library - Interior पर क्लिक करें

बेहर के रंग

अंतर्जाल पर जितने भी बढ़िया काम करने वाले वेब डिज़ाइनर हैं वे सब प्रकृति अथवा आस पास की दुनिया से ही रंगो के मिश्रण देख कर चुनाव करते हैं। मैंने ऐसा उन्हीं से सीखा है। मुझे बेहर के रंगो के नमूने में से पंसद आया नीचे दिया गया अभिकल्प

Spirited-Carefree - from http://behr.com

जब माईकल ने कुबरिक अभिकल्प जो कि वर्डप्रैस में सर्वाधिक प्रसिद्ध है दुनिया के सामने पेश किया था तो उन्होंने उसे बनाने की विधि भी बताई थी। जिस में पहला काम अपने पूरे अभिकल्प की छवि बनाने के लिए बताया गया था। मैंने भी बसंत के लिए जिम्प में एक छवि तैयार की।

बसंत

आप यहाँ से बसंत की जिम्प फाईल डाउनलोड कर सकते हैं। इस के बाद काम आसान था, ब्लॉग के अलग अलग भागों जैसे हैडर, फुटर, साइडबार, और बैकग्राउण्ड के लिए छवियाँ काटनी थी। तो लीजिए बस हो गई नई छवियाँ तैयार।

इसके बाद का काम है कोड बदलना जिस के लिए आप को php की जानकारी होनी आवश्यक है। वह किसी और समय।

6 Responses to “कहानी बसंत की”

  1. Excellent - these colors are easy on eyes.

    I could not wait to get a theme for multiple blogs - resorted to a readymade solution- Neuron - layout is not that bad, its a little too blue for me but I’ll move on eventually.

  2. स्वामी - मल्टीपल ब्लॉगस क्या बात कर रहे हैं आप, मैं समझा नहीं और साथ ही ऐक बहुत सही थीम के बारे में पता चला है नाम है वुहान, जरा यहाँ जाकर देखिए शायद आप को पसंद आए।

  3. स्वामी जी,
    दूसरे की थीम तो हर कोई इस्तेमाल कर लेता है, अपनी इन्डिया स्पेशल थीम बनाकर दिखाओ, आखिर हम भी तो देखे तुम्हारी कल्पनाशीलता और तकनीकी ज्ञान. हाँ एक बात हम पहले ही कहे देते है, खाली पीली बात करके टाइम वेस्ट मत करना, थीम लिखने के लिये भले कुबरिक वाले भइये की शरण मे जाओ चाहे चन्द्रास्वामी की, लेकिन थीम लिख कर ही सामने आना. नही तो हम समझेंगे कि तुम भी कनपुरिया भाषा मे मुंगेरीलाल हो.

  4. वर्डप्रेस की एक और तरकीब सिखाने के लिए शुक्रिया। जहाँ तक “अभिकल्प” शब्द का सवाल है, उसका स्रोत बताता हूँ। यदि किसी का लखनऊ से या भारतीय रेल से कोई वास्ता हो तो उसने RDSO का नाम ज़रूर सुना होगा, जो वर्षों तक एक रेलवे इंजीनियर होने के नाते मेरे लिए मक्का जैसा था। उसका पूरा नाम है Research, Designs and Standards Organization, और हिन्दी में “अनुसन्धान, अभिकल्प एवं मानक संगठन”।

  5. texas homeowners insurance appraisal

    burdening!blade Asilomar:fathom:achiever Derbyshire

  6. bet analysis

    aboveboard deliciously.aces impartial punitive gospels

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