इंस्क्रिप्ट लेखनी

इंस्क्रिप्ट का प्रयोग कितने लोग करते हैं वह तो पता नहीं, पर यह बताता हूँ कि इसका प्रादुर्भाव हुआ कैसे। यानी इंस्क्रिप्ट का नहीं, इस लेखनी का।
हुआ यूँ कि मनीला शहर में मेरा लॅप्टॉप बैठ गया, कहने लगा कि हार्ड डिस्क 0 मौजूद नहीं है। यह कौन समझाए उसे कि 0 का मतलब ही नामौजूद है! चुनाँचे हिन्दी लिखने के लाले पड़ गए। अब आप कहेंगे कि भइया वैसे ही कौन सा बड़ा लिखते हो पर वह दीगर बात है।
तो मैं पहुँचा नॅटोपिया, यानी फ़िलिपीनो साइबर कॅफ़े। वहाँ था तो ब्रोड्बॅण्ड, लेकिन आप कुछ तन्त्रांश स्थापित नहीं कर सकते, जो है बस वही है। तो इस तरह प्रादुर्भाव हो गया इस पन्ने को जो समर्पित है ईस्वामी जी को जिन्हें है तो इंस्क्रिप्ट से नफ़रत पर हगने में काफ़ी आगे हैं। उन्होंने एक और सुझाव दिया था कि अङ्ग्रेज़ी अक्षर छपने से पहले ही दबोच लो, ताकि वो बक्से में दिखे ही ना। (आप देखेंगे कि पहले रोमन अक्षर छपता है और फिर वह बाद में बदलता है।)
लेकिन मुद्दा यह है कि अट्ठारह लोग अलग अलग कुञ्जी विन्यास चाहते हैं तो क्या अट्ठारह बार लेखनी पैनी की जाएगी? या तो (1) सभी एक ही विन्यास का प्रयोग करें, (2) या कोई ऐसा तरीका हो कि हरेक प्रेमचन्द अपनी पसन्द का विन्यास पर्दे पर ही चुन ले, बदल ले, सँजो ले ताकि फिर से काम में ला सके।
अब पहली वाली स्थिति तो तभी होगी जब पूरी दुनिया आर्य बन जाएगी, इसलिए दूसरी वाली के बारे में ही सोचना पड़ेगा नहीं तो हम लोग लिखेंगे कम और तख्तियाँ ज़्यादा बनाएँगे। सँजोने वगैरह वाले काम तो मैंने कभी किए नहीं है, इसके लिए तो कुछ सर्वर साइड वाला काम करना पड़ेगा। पर जैसे कि मेरा प्रोजेक्ट मैनेजर कहता है, डूएबल तो होगा ही। आपका क्या विचार है?

12 Responses to “इंस्क्रिप्ट लेखनी”

  1. आलोक भाई,

    यह मुद्दा विन्यासों के चुनाव का ही नही है, उनको बनाने और मुहैया करने के तरीकों का भी है.

    ये software design का मामला है, बात देवनागरी की ही नही है अन्य भारतीय भाषाओं की भी है.
    आज हम जो बना रहे हैं वो जुगत बस की मेप बदल कर आसानी से कोई गुजराती वाला भी प्रयोग कर सके ये विचार भी है. प्लानिंग से साथ होना चाहिए - उठे और शुरु हो गए वाली बात नही है. कोड का कसा हुआ होना और हल्का-फ़ुल्का होना सही रहता है - वेब का मामला है.

    मेरे हिसाब से जो-जो वेब साईट्स हिंदी/देवनागरी में हैं उन उन वेबसाईट्स पर लेखन और टिप्पणी के लिए हिंदी विन्यास उपलब्ध कराने का एक सुलभ तरीका होना चाहिए, साईट से बाहर जा कर लिख कर कट पेस्ट करने की क्या जरूरत? मान लीजिए आप हिंदी के २० साईट्स पर जाते हैं हर साईट पर (जो यूनीकोड मे हो) आपको टिप्पणी करते समय ही विन्यास का चयन करने की सुविधा हो - एक फ़ोकट की जुगत जो साईट का वेब-मास्टर पहले ही implement कर के बैठा है हमको तो वो जुगत बना कर मुहैया करवानी है, कोड प्लग-इन करने मे आसान हो - किसी भी टेक्स्ट एरिया पर चले और उपयोग कर्ता के काम का विन्यास उतार ले और आपका चयनित विन्यास याद रखे कुकी के माध्यम से - आपको खुद की-मेप बनाने की जरूरत नही है - कितने ही विन्यास हों २० से ज्यादा नही होंगे ना. पहले से बना दो. पर उतरे वही जो ड्राप-डाउन के माध्यम से चुना गया. बाद में भाषा के चयन का भी फ़ण्डा जोडा जाए. खास अकल इस बात पर लगेगी की जावास्क्रिप्ट का कोड वही उपयोग कर्ता की मशीन पर उतरे जिसमे उसकी दिलचस्पी हो - सारे विन्यास ना उतरें - वो देखना पडेगा, कभी किया नही. कुछ तरीका होगा - अपेक्षा है.

    अब यह तरीका जावास्क्रिप्ट मे ही हो सकता है ताकी हर जगह चले. मैने आपको जो जावास्क्रिप्ट की फ़ाईलें भेजी थीं वो यही दिखने के लिए की की-मेप २० हो सकते हैं उन मेसे अपनी पसंद वाले का चुनाव करो और शुरु हो जाओ. अभी वाला उदाहरण फ्नेटिक चलाता है, आपको तो बस की-मेप बदलना होगा - फ़िर ये जोडा जाए की टेक्सट एरिया के उपर एक ड्राप-डाउन मे से आप चयन करो ले-आउट का नाम जुगत को इस प्रकार सेट कर सकता हूं की वो सही कीमेप के हिसाब से चले. फ़िर चहे तख्ती वाले अपना की मेप जोड दें या रेमिगटन ..सब एक से चलने लगेंगे!

    विन्यास बदलने और संजोने का आईडिया बहुत ही धुरंधर है पर दिक्कते गिना देता हूं -

    सबसे पहले - आपको एक ही साईट पर निर्भर रहना होगा जहां ये सुविधा हो.

    दूसरे आपके विन्यास को सहेज कर रख भी दिया तो आपको उस्का चुनाव करने के लिए और अलग-अलग कम्प्यूटर से चुनाव करने देने और याद रखने के लिए भी जुगत जोडनी होगी - ओवरहेड है.

    अगर आपको एक साईट चहिए जहां आपकी पसंद का विन्यास आपने रखा है तो कट पेस्ट का झंझट रहेगा.

    फ़िर वो साईट सभी को पता भी हो! काहे??

    अपरोच ऐसी हो की उपयोग करता को चम्मच से खिला दो! इतना आसान बना दो. हर जगह जहां वो जाए - मानिकीकृत खुला फ़ोकट का कोड काम करता हुआ मिले - अभी साईट्स की संख्या कम है करना आसान है.

    आप अगर की-मेप को बदल कर इन्स्क्रिप्ट वाला बना दो और अगर कोई तख्ती वाला बना दे तो मैं दिखा सकता हूं की मैं क्या कहना चाह रहा हूं. ड्रप-डाउन से तीन सेलेक्शन मुहैया करवा देंगे - फोनेटिक, इन्स्क्रिप्ट और तखती फ़िर चुनो और लिखना शुरु.

    आशा है ब्रेन-स्टार्मिंग जारी रहेगी! कहिए क्या खयाल है?

  2. जनाब, आपकी बात समझ गया, विन्यास को इंस्क्रिप्ट वाला बना देता हूँ। इंस्क्रिप्ट बना गया तो तख्ती में भी ख़ास दिक्कत नहीं आएगी। 24 घण्टे की मोहलत दें। एक और सवाल है हग के बारे में जो मैंने पहले भी पूछा था, क्या इसपर जीपीऍल का ठप्पा रहेगा? तख्ती जीपीऍल नहीं था, इसलिए उसका विकास आगे नहीं हो पाया। एक व्यक्ति तक सीमित रहा। उम्मीद है कि हग का वही हाल नहीं होगा। जीपीऍल को एक बार ध्यान से पढ़ लें - http://www.gnu.org/copyleft/gpl.html - इसके बगैर लिनक्स में कोई भी तन्त्रांश जोड़ना - यानी बाई डिफ़ाल्ट - बहुत मुश्किल होगा, और सब टूल धरे के धरे रह जाएँगे। माने न माने स्वयंसेवी प्रोग्रामर लिनक्स की तरफ़ ज़्यादा हैं और अग़र और भाषाओं को जानने वाले प्रोग्रामरों को खींचना है तो भी यह ज़रूरी होगा।

  3. आलोक भाई,

    हाँ जी, यह बिल्कुल open source रहेगा - मेरी और रमण भाई की यही इच्छा रही है की यह ज्यादा से ज्यादा लोगो तक जाए!

    यहां तक की हम ने इस कोड को wordpress या दूसरे ओपेन सोर्स मे घुसाया तो उस तरह के हेक्स या प्लग इन्स या जुगत भी खुले तौर पे ही उपलब्ध रहेंगे .. we have many locations to host such extra snippets and thingies, even old HUG is hosted on jitu’s site - I am too lazy to put it on hindini and even I use it from his site. :)

    मैने वर्ड-प्रेस वालों के सलीके से यही गुर सीखा है की वो बहुत ही तरीके से और समझदारी से लंबी सोच ले कर छोटे उत्पाद को भी सफ़ल और उपयोगी बना पाए. इसलिए मानिकीकरण हम प्रोग्रामर्स की आम सहमती से बना रहे और अनुमती पर ही कुछ शुरुआती परिवर्तन हों. अगर किसि और नाम से या किसी और प्रोजेक्ट में परिवर्तन करने हैं या कोड के हिस्से चाहिए तो कोड खुला है, छोटा सा और आसान सा है - आवश्य प्रयोग करो.

    इस वाले प्रोजेक्ट भर के लिए ही हमें कुछ नियंत्रण चाहिए होगा ताकी इस शुरुआती प्रोजेक्ट भर में आने वाले परिवर्तन हमारी अनुमती से हो जाए - अनुशासित तरीके से (version control point of view). with correct documentation! क्या यह संभव है?

    इसलिए इसका GNU लाईसेंसे लेना और सोर्स फ़ोर्ज पर इसको डालना - एक प्रोजेक्ट के रूप में उस के लिए जो भी करना है वो बताईये और करवाईए!

  4. ईस्वामी जी,
    देसी सोर्स्फ़ोर्ज - http://sarovar.org पर एक नज़र डालिए।
    है न बढ़िया? बिल्कुल हमारे लिए ही बना। इसका आतिथ्य हिन्दुस्तान में है, इसलिए हिन्दुस्तान में रहने वाले लोगों को गति अच्छी मिलती है।
    अव्वल तो वहाँ सदस्यता ले लें। नई परियोजना खोलना तो मुश्किल नहीं है, पर उस पर सोच विचार पहले कर लेते हैं।

    आलोक

  5. I read you article about it at http://www.devanaagarii.net/hi/gpl/
    I will insert the GPL comments in the code.

    We should give sarovar.org the first try - if we fail to get more programmers involved then we should try sourceforge.net What do you think?

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  7. ईस्वामी जी,
    ठीक है, शुरुआत तो करते हैं।
    आलोक

  8. […] को खुल्लमखुल्ला तकनीकी सूचनाओं काआदान-प्रदान करते देखता हूं तो अफसोस […]

  9. […] ो खुल्लमखुल्ला तकनीकी सूचनाओं का आदान-प्रदान करते देखता हूं तो अफसोस होत […]

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