पूछ ले भाई कुछ फ़ुरसतिया से

निरंतर का अगला अंक निकलने में मात्र नौ दिन बचे हैं.इसमें एक स्तम्भ होता है-पूछिये फुरसतिया से.अभी तक कोई सवाल नहीं पूछा गया.पिछले अंको में भी जीतेन्द्र और फुरसतिया का जवाबी कीर्तन होता रहा.बीच-बीच में शैल संगत देते रहे.क्या बात है?लगता है स्वामीजी की बात सही है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था सवाल पूछना
नहीं सिखाती.पूछ लो भाई कुछ अगर हो मन में .संपादकाचार्य नोट करें-हमारी दौड़-धूप में कोई कमी नहीं है.

7 Responses to “पूछ ले भाई कुछ फ़ुरसतिया से”

  1. लो भई, हमारे जवाबी कीर्तन का, सवाली हिस्सा, अब जवाब यहाँ पर मत देना, जवाब निरन्तर पर ही देना, लोगो को भी थोड़ा इन्तजार करने दो.

    १. आज कल हसीनों मे शर्मो हया क्यों नही है, वो शरमाना, वो लजाना, सब गायब सा क्यों हो गया है?

    २. जब साथी कहें ब्लाग लिख, दिल कहे कूद जा मैदान मे और दिमाग कहे रूक जा,तो क्या करना चाहिये?
    ३. कहते है कभी किसी को मुकम्मल जहां नही मिलता है, आपका जहां कितना मुकम्मल है?
    ४.आप ब्लाग लिखते है, कहानिया लिखते है, अब तो गीत और गज़ल भी लिखते है, अरे जनाब ,कंही आपको भी रवि भाई वाली गज़ल बनाने वाली मशीन तो नही मिल गयी.
    ५. आखिरी सवाल, क्या आशा ही जीवन है? यदि हाँ, तो ये जवाब दीजिये आशा तो फीमेल है और जीवन मेल, ये कैसे हो सकता है?

  2. Questions better be posted by direct mail to Anup or Patrikaa ID. Not on comments to posts like this or public forums please.

  3. दो सवाल दाग दिया हूं. Bhaiya jeetu ye aasha female aur jeevan male humne apne anugunj wale post ke liye likha tha (abhi hindi me type karna hai), jaankar khusi hui ki koi aur bhi hai jo apne jaisa hi sochta hai….

  4. patrika@gmail.com पर मेल किया था पिछले अंक के लिये.मेल मिला या नहीं बताईये?

  5. nahi mil hoga. Patrika ID is patkrikaa @ gmail . com

  6. शैल का सवाल मिला था.जवाब भेजा था.फिर भेजता हूं -दुबारा.

  7. em betting strategy

    declarative chamberlain.Warnock:dissociation trolleys

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