चिट्ठा चर्चा
Posted on अप्रैल 21st, 2005 द्वारा विजय ठाकुर
चिट्ठों की दुनिया के बारें आजकल धड़ाधड़ छापा जा रहा है। यहाँ तक कि हिन्दी चिट्ठाकारों की सँख्या जब 50 के आसपास ही लटक रही है एकाध से ज्यादा प्रतिष्ठित जगहों पर हो चुकी है, और आशा है आगे और भी होगी। फिलहालस ये चिट्ठे व्यवसाय की दुनिया को कैसे प्रभावित करेंगी इसके बारे में इस बिज़नेस पत्रिका में देखा। आशा है आपको भी दिलचस्पी होगी। सो पढिए फुर्सत में।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




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