10वीं अनुगूँज के लिए लिखें एक चिट्ठी…
प्रिय चिट्ठाकार मित्रों,
10 वीं अनुगूँज का विषय है - “एक पाती ‘…’ के नाम”
यहाँ ‘…’ कोई भी हो सकता है – आपका प्यार, पालक, पुत्र-पुत्री, मित्र, शत्रु या फिर कोई और जैसे कि आपका प्यारा सा डॉगी.
जैसे कि मैं एक पाती लिखने जा रहा हूँ अपने आँगन में, लताओं के बीच एक घोंसले में अपने बच्चों को तमाम जगह से दाना ढूंढ लाकर खिलाती चिड़िया को – उस चिड़िया को, जिसका घोंसला घास फ़ूस के बजाए प्लास्टिक के रेशों और क़ाग़ज के टुकड़ों से बना है…. गुम होते जंगलों और वृक्षों की वज़ह से…
तो, मेरे ब्लॉगर मित्रों, लिख डालिए एक चिट्ठी – किसी को भी, कोई सा भी विषय लेकर और विषय न हो तो यूँ ही गप-सड़ाका लगाकर. वैसे भी इंटरनेट, मोबाइल और एसएमएस के जमाने में आज कोई किसी को चिट्ठी लिखता भी है क्या? तो इससे पहले कि हम चिट्ठी लिखना भूल जाएँ, आइए याद करते हैं साहित्य पठन के अपने पहले सबक – चिट्ठी लिखने को – और लिख डालते हैं एक पाती…
अपनी पाती 24 मई तक अपने ब्लॉग के माध्यम से लिख दें, और ज़ाहिर है, अनुगूंज का लोगो चिपकाना न भूलें. नहीं भी चिपका पाए तो चलेगा, बस याद दिलाने के लिए मेरे इस ब्लॉग पर कमेंट ज़रूर डाल दीजिए ताकि आपकी चिट्ठी कहीं गुमे नहीं और सही जगह पहुँच जाए…
शेष कुशल. बाकी अगले पत्र में.
आपका
रवि
Filed under: अनुगूँज

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




मित्रों, छुट्टी पर जाने की हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गई. अनूप जी मुझे माफ़ करें, दसवें अनुगूँज की घोषणा से पहले ही मैंने 11 वें की घोषणा कर डाली. बहरहाल, अनूप जी ने मुझे अनुमति दे दी है कि इस आयोजन को 10 की क्रम संख्या दे दी जाए, और वे 11 वें का आयोजन करेंगे.
वैसे, एक विषय तो आप सबको मिल ही गया है चिट्ठी लिखने को - मुझे मेरी हड़बड़ी की गड़बड़ी पर गरियाने और लतियाने का …
आपके ख़त के इंतजार में,
रवि
हमारी पाती तैयार हो गयी । पाती की कङी यहाँ है ।
क्षमा करें, यह मुझे बाद में ध्यान आया। पर मेरे विचार में “अनुगूँज”
> स्त्रीलिंग ही होना चाहिए, क्योंकि “गूँज” स्त्रीलिंग है। आप का क्या
> विचार है?
>रमण
ओफ, पूरा अनुगूँज ही स्त्री लिंग है. नालंदा शब्दकोश में भी यही दिया है.
इस भीषण ग़लती की ओर इंगित करने के लिए ढेर सारा धन्यवाद. अपनी ग़लती अभी
सुधारती हूँ (ओह, सुधारता हूँ
रवि
हमारी पाती तैयार हो गयी । ।
पाती की कड़ी यहाँ है
एक पत्र …बेटी के नाम! अनुगूँज के लोगो सहित पोस्ट कर दिया है।
महावीर
एक पत्र …बेटी के नाम! अनुगूँज के लोगो सहित पोस्ट कर दिया है।
महावीर
‘एक पत्र - बेटी के नाम…! के साथ एक और पाती
‘सुसराल से पाती आई है’ - अनुगूँज के लोगो की पोस्टेज-टिकट लगा कर
महावीर डाक-घर द्वारा पोस्ट कर दिया है।
हमारी पाती तैयार हो गयी ।
कृपया मेरी प्रविष्टि देखें
एक नज़र इधर भी डालिये :
http://anoopbhargava.blogspot.com/
http://fursatiya.blogspot.com/2005/05/blog-post.html#comments
[…] ाल करने लग गए थे। पाती लिखने के लिए कहा गया, तो मन में आया कि वास्तव में पाती […]
भई, हमारे छोटे से लेख को भी शामिल किया जाय.
http://www.jitu.info/merapanna/?p=313
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