अगस्त्य कोहली का लेख
Posted on मई 27th, 2005 द्वारा आशीष
अभी हाल में अगस्त्य कोहली का लेख पढ़ा अभिव्यक्ति पर, अच्छा लगा और काफ़ी सच दर्शाता है।
आप भी देखें(सुशा फॉन्ट आवश्यक): http://www.abhivyakti-hindi.org/vyangya/2005/sanskritik_virasat.htm
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




बहुत सही। सारी की सारी कहानी आखिरी वाक्य में समाहित है जरूर पढ़िएगा