११वीं अनुगूँज-माज़रा क्या है? आखिरी पुकार
Posted on जून 30th, 2005 द्वारा अनूप

समय किसी के रोके नहीं रुकता । सो ३० तारीख आ पहुँची। यह समय सीमा थी-ग्याहरवीं अनुगूँज के समय की। जैसा कि पंकजजी ने बताया कि समय का फेर है यहाँ-वहाँ का सो मौका है अभी भी हाथ आजमाने का । ठेलुहे कलकत्ते में अड्डेबाजी कर रहे हैं। संपादक जुटे हैं किसी ग्राफिक को चिपकाने में। देवाशीष का तो लगता है अनुगूँज सेहुकअप संबंध ही है।लिख भइये ताव में ही कुछ लिख। कोई समय सीमा नहीं तुम्हारे लिये।महिला चिट्ठाकार पीछे किसलिये रहना चाह रही हैं।आगे आयें कुछ लिखें।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




चौपाल में एक माज़रा यह भी है ।
हमारे चिट्ठाकार बंधुगण अनुगूँज में लिखने के बाद उसकी कङी चिपकाने का काम कभी पहली घोषणा, कभी दुसरी घोषणा तो कभी अंतिम घोषणा के टिप्पणी में , तो कभी बिलकुल नहीं चिपकाते है । उस परिस्थिति में फीड से ही हम उसके बारे में जान पाते हैं । इस तरह से खोज -बीन न कर, क्या अगली अनुगूँज से इसके लिए एक ही सुविधाजनक सर्वमान्य चिपकु स्थान हो सकता है ?