लाइवजर्नल पर धावा
लाइव जर्नल से लगभग सभी परिचित होंगे। लेखा और और लेखकों के समुदाय यहाँ अन्य प्रकाशन उपकरणों व स्थलों के मुकाबले काफ़ी सशक्त हैं। साथ ही, इस स्थल का पूरा स्रोत मुक्त है, आप चाहें तो अपने स्थल पर भी इसे चढ़ा सकते हैं, जैसा कि सराय वालों ने किया।
अब यह हिन्दी में भी उपलब्ध है।
हिन्दी वाला हिस्सा देखने के लिए मुख पृष्ठ पर जाइए, और उसके बाद अपनी पसन्द चुनिए। यदि आपका खाता यहाँ न हो तो खोल सकते हैं। खोलने के पैसे नहीं हैं, चाहें लिखें या न लिखें। आलोक व देबाशीष पहले ही यहाँ सदस्य हैं। आपका भी स्वागत है।
आप देखेंगे कि स्थल अभी चौथाई हिन्दी, पौना अङ्ग्रेज़ी है। पूरा हिन्दी करने का प्रयास जारी है, और आप भी इसमें योगदान दे सकते हैं।
शुरुआत करने के लिए, खाता खोलने के बाद अनुवाद समुदाय में एक गुहार करें। थोड़ी प्रतीक्षा करनी पड़ती है, हम लोग साथ साथ दबाव डालेंगे तो थोड़ा जल्दी होगा।
इस वक़्त कई भाषाओं के दल मौजूद हैं, फ़िलहाल हिन्दी अनुवादकों का समुदाय नहीं है, उसके लिए अनुरोध कर दिया है। जल्द ही बन जाना चाहिए।
आप सबसे दर्ख़्वास्त है कि कुछ दस मिनट समय निकाल के आपना खाता खोल लें, या यदि पहले ही खाता हो, तो सत्रारम्भ कर लें, और एक दूसरे को मित्र बना लें।
और फिर, अनुवाद में जो भी त्रुटियाँ मिलें, उनका ब्यौरा दें या उन्हें चर्चा के बाद ठीक भी कर दें - इसके लिए आपको पहले हिन्दी अनुवाद की अनुमति लेनी होगी।
बस उसके बाद तो लाइवजर्नल दुर्ग पर धावा बोल ही देंगे। गढ़ भी आएगा और सिंह भी। यानी केवल लाइवजर्नल ही नहीं, उसके कूट का इस्तेमाल करने वाले अन्य स्थल भी इसका लाभ उठाएँगे, आप चाहें तो अपने स्थल पर भी इसे डाल सकते हैं।
और हाँ, यह समाचार अपने लाइवजर्नल चिट्ठे पर डालना न भूलें, भले ही वह हिन्दी के अलावा किसी अन्य भाषा में ही क्यों न हो। खरबूजे के रङ्ग बदलने के लिए।
Filed under: सूचना

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




भइया,आम जनता को यह बताया जाये कि लाइव जर्नल में ऐसा क्या है जो इसे पाने के लिये लपका जाये? ब्लागर तथा खुद की साइट के मुकाबले क्या अनोखा है इसमें जो नया हिसाब बनाया जाये इसमें?
I was really andpleasantly surprised to visit this site. This is a BIG service to Hindi world. Congrats and keep it up!
ब्लागर तथा खुद की साइट के मुकाबले क्या अनोखा है इसमें
ऐसा कुछ नहीं। समझिए, रोटी, नान, तन्दूरी - पेट सभी से भरेगा, अपनी अपनी पसन्द है।
जो लोग नई शुरुआत कर रहे हों उनके लिए एक और विकल्प है।
जिनके पहले ही चिट्ठे हैं, वे भी यहाँ का सदस्य बन के बेनाम टिप्पणियोँ छापने के बजाय नाम के साथ छाप सकते हैं।
सब्ज़ी की जितनी दुकानें होंगी, उतना मज़ा आएगा मण्डी जा के।
Anup: Another view is: People who are starting with LiveJournal or installing LJ at their servers will have the Hindi version with them too. I recently did the Hindi-karan of Simon Brown’s “Pebble” and this was the intention.
hello friends,
hindi chiththa vishwa mein nai hoon aur ise baare mein jayaja jaankaari bhi nahi hai. lekin agar aap log sahyood kare to mein bhi isse judna chahti hoon.
waiting for reply
tks
saroj singh
hello friends,
mein hindi chiththa viswa se mein bilkool nayi hoon aur isse baare mein jayada jaankari bhi nahi hai. agar aap log sahyog kare to mein isse judna chahoongi.
waiting for reply
tks
saroj singh
sir, maine pada aapko.
main journalism ka student huin. jamia millia islamia ka. sir, mujhe “achala sharma ” tatha sakuntala chandan ka email id chahta huin taki main inko mulakat kar saku.
aapka hindi journal ek thosh kadam hai hindi janne walo ke liye. isi cheez ka mujhe mahino se chah thi. aap ka bahut bahut dhanwad. but address jarur diziyega.