१२वीं अनुगूँज : सुभाषित सहस्र / अंतिम पुकार
Posted on अगस्त 24th, 2005 द्वारा अनुनाद
बन्धुओं , सुभाषितों की वर्षा के लिये मैं वैसे ही छटपटा रहा हूँ जैसे मालवा के किसान पानी के लिये ।
मालवा में बारिस का आँकडा चालीस इंच का है , उसका आधा कोटा तीन-चार दिन की बारिस मे पूरा हो गया । उसके बाद महीनों से सन्नाटा है । १२वी अनुगूँज का आँकडा भी आधे को पार कर गया है । हमारी आशा की फसल अभी भी लहलहा रही है । कुछ धुरन्धर मेघ अब भी बरसने को बाकी हैं । सो हे मेघगण ! शीघ्र बरसिये , क्योंकि
का बर्षा जब कृषि सुखानी , समय चूकि पुनि का पछतानी ।
Filed under: अनुगूँज

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 



