१२वीं अनुगूँज : सुभाषित सहस्र / अंतिम पुकार

बन्धुओं , सुभाषितों की वर्षा के लिये मैं वैसे ही छटपटा रहा हूँ जैसे मालवा के किसान पानी के लिये ।
Akshargram Anugunj
मालवा में बारिस का आँकडा चालीस इंच का है , उसका आधा कोटा तीन-चार दिन की बारिस मे पूरा हो गया । उसके बाद महीनों से सन्नाटा है । १२वी अनुगूँज का आँकडा भी आधे को पार कर गया है । हमारी आशा की फसल अभी भी लहलहा रही है । कुछ धुरन्धर मेघ अब भी बरसने को बाकी हैं । सो हे मेघगण ! शीघ्र बरसिये , क्योंकि

का बर्षा जब कृषि सुखानी , समय चूकि पुनि का पछतानी ।

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