अक्षरग्राम - भारत व अमरीका
Posted on नवम्बर 22nd, 2005 द्वारा पंकज
आजकल गूगल एनालिटिक्स की उपलब्धता के कारण अक्षरग्राम(नारद, सर्वज्ञ सहित) पर कितने लोग आते हैं कहां कहां से आते हैं के बड़े ही सुंदर ग्राफ मिलते हैं जरा नीचे दिए गए ग्राफ पर नजर डालें

यह मानते हुए कि अक्षरग्राम प्रेमियों की संख्या का प्रतिशत हर जगह बराबर भारत में नेट उपलब्धता की विषमताएं एक दम सामनें हैं। पर मजे की बात है कि अमरीका से साफ पता चलता है कि देसी बंधु हर जगह जहाँ आबादी है बस चुके हैं। बीच का इलाका खाली है क्यूँकि इसे आप लगभग रेगिस्तान समझ सकते हैं। है न एक फोटू हजार शब्दों के बराबर।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




लगता है हिन्दुस्तानी लोग अमरीका के चारो ओर घेराव बना के बैठे हैं। और हिन्दुस्तान में सबसे वेले दिल्ली वाले हैं।
पंकज जी,
आज मैंने प्रयत्न किया गूग्ल अनालिटिक्स में साइन अप करने का लेकिन उन्होने अबी सदस्यता देनी बन्द कर दी है…आपके पास कोई तरीका है जिससे मैं भी साइन अप कर सकूं?
अनाम जी,
चिन्ता मत करिए, चिड़िया ने खेत चुल लिया तो फसल फिर उगेगी। उनको आप अपना डाक पता दे देजिए, जब दुकान दुबारा खुलेगी तो वे आपको सूचित करेंगे।
आलोक जी,
अब सारे वेले दिल्ली में इक्कठे बैठे हैं या फिर सभी वेलों का ट्रैफिक इक्कठा दिल्ली से निकलता है शोध का विषय है।
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