अनुगूँज 17: क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए?

Akshargram Anugunjदोस्तो, मैंने सतरहवीं अनुगूँज की मेज़बानी करने की तो सोच ली लेकिन मैं खुद इस विषय का माहिर बिलकुल नहीं हूं। ये तो ऐसे ही ‘कभी कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है’। तो इस बार की अनुगूँज का विषय है: क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए? क्या पुनर्मुल्याकंन करके एक नई मुद्रा बनानी चाहिए जैसे 1 नया रुपया = 50 पुराने रुपये?

युरोपीय देशों में भी दिसंबर 2001 से यूरो शुरू हो गया था। इसका असर लोगों पर अच्छा नहीं पड़ा। यूरो की कीमत जर्मन मार्क से दोगुनी थी। अंततः यूरो के आने से लोगों की तन्ख़ाह आधी रह गई थी परन्तु खर्चे आधे नहीं हुए, बल्कि आधे से 20-30 प्रतिशत ज़्यादा हो गए थे। पहले 1 मार्क की कीमत वाली चीज़ अब लगभग 1 यूरो हो गई थी।

वैसे जर्मनी और भारत की अर्थवय्वस्था तो काफ़ी भिन्न है। आपको क्या लगता है कि भारत में नई मुद्रा लागू करने के क्या नफ़ा नुकसान होंगे? मेरे हिसाब से फ़ायदे:

  • नई मुद्रा को इस्तेमाल करने वाली आटोमैटिक मशीनें बनाईं जा सकती हैं जिनसे लोग टिकटें आदि ख़रीदें।
  • नेताओं के दबाये हुये ब्लैक के करोड़ों रुपये बाहर आएंगे।
  • बाहर जाने की लालसा कम होगी। रुपयों डॉलरों में फ़र्क कम रह जाएगा। डॉलर की तरफ़ आकर्षण कम हो सकता है।

नुकसान:

  • महंगाई बढ़ेगी।
  • गरीबी बढ़ सकती है।
  • ज़्यादा तनख़्वाह की माँग हो सकती है।
  • शायद अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां भारत में निवेश से हिचकें।

आपका क्या ख़्याल है? अपनी प्रविष्टि अपने ही ब्लॉग पर 13 जनवरी, 2006 के पहले पहल प्रकाशित कर यहाँ टिप्पणी या ट्रैकबैक द्वारा बतला दें। अनुगूँज के नियम यदि आप न जानते हों तो यहाँ पढ़ सकते हैं।

6 Responses to “अनुगूँज 17: क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए?”

  1. विषय अच्‍छा है,पर सर तो च‍करायेगा ही,कविता,कहानी लिखने वालों का !
    -राजेश

  2. […] रजनीश ने सत्रहवीं अनुगूँज की और विषय है, “क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए?“। उनका कहना है कि जैसे 2001 में यूरोप में नई मुद्रा यूरो का प्रयोग चालू हुआ था और कई बदलाव आए थे, उसी प्रकार भारत में यदि एक नई मुद्रा चालू की जाए जिसका एक रूपया पुराने पचास रूपयों के बराबर हो, तो यहाँ पर भी क्राँति आ सकती है। उदाहरण वे दे रहे हैं जर्मनी का जिसके मार्क की कीमत से दोगुनी कीमत यूरो की रखी गई और जिसके कारण वहाँ की अर्थव्यवस्था में कई बदलाव आए। रजनीश ने सोच विचार करते हुए कुछ परिणामों को अंकित किया है जो कि सार्थक हो सकते हैं यदि भारतीय मुद्रा का पुनर्मूल्यांकन किया गया तो। […]

  3. romani lipi mein chit-tha chhodane ki maphi.

    aapka sujhav sochane layak to hai, lekin is se amriki dollar kokhareedne aur rakhne ka lalach kam nahin hoga. amriki dollar ki shakti us desh key arthik stithi par nirbhar hai, na ki aap ke bank khate sey joode hue shunyon se. agar mujhe waqt mila to mey is vishay par jaroor apni vistarit tipani karoonga.

  4. इस विषय पर मेरी बकवास यहां पढ़ें…. www.mpsharma.com….नीरज

  5. “क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए?” विषय देखकर पहले सोचा भाग लिया जाए फिर सोचा भाग लिया जाए……..इस विषय पर मेरी बकवास यहां पढ़ें…. www.mpsharma.com….नीरज

  6. प्रविष्टि में देर (ट्रू इंडियन स्टाइल में) तो हो गई है, परंतु आशा है सम्मिलित हो ही जाएगी… :)

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