अवलोकनी - अनुगूँज 17
Posted on जनवरी 31st, 2006 द्वारा rajneesh

सभी को मेरी नये साल की हार्दिक शुभकामनाये. अनुगूँज में भाग लेने का सभी को शुक्रिया. मैं काफी व्यस्त होने की वजह से अभी तक सारी पर्विष्टियां पढ नहीं पाया हूं. लेकिन लगता है कि यह विषय किसी को भाया नहीं है. तो अवलोकनी करने लायक कुछ है नहीं. एक तसल्ली है कि सभी ने भाग तो लिया. अभी तो मैं ये पोस्ट यहीं खत्म करना चाहूंगा. समय मिलने पर और लिखूंगा. धन्यवाद्.
Filed under: अनुगूँज

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




अरे भाया, विषय तो बहुत भाया, लेकिन समझ मे नही आया कि लिखे तो आखिर लिखे क्या?
ऊपर से आपने भी अपनी पोस्ट नही लिखी, नही तो उसी से कुछ टीप टाप कर लिख देते।
नियमानुसार, सबसे पहले तो आप अपनी पोस्ट लिखिये और अब जितने लेख लिखे गये है, उनको मिलाकर अवलोकनी पोस्ट लिखकर , इस अनुगूँज को तो कम्प्लीट कीजिये, ताकि दूसरे महारथी भी अगली अनुगूँज का आयोजन कर सकें।
उम्मीद है आप जल्द ही इसे कम्पलीट करेंगे।