अनुगूँज: आदमी सौ के ऊपर और पोस्‍ट चार

हम पढ़ते आ रहे थे बहुत दिनों से हिंदी ब्‍लोगरों की संख्‍या १०० के ऊपर पहुँच गई है, लोगों को तालियां बजाते देखा भी, सुना भी। लेकिन अनुगूँज की प्रविष्‍टियाँ देखें तो नही लगता कि आदमी सौ के ऊपर। पहले ये संख्‍या कम होती थी लेकिन अनुपातिक प्रविष्‍टियाँ अच्‍छी खासी। तो भाई लोगों किस बात का इंतजार कर रहे हो तुरंत अपनी प्रविष्‍टि लिख मारिये।

16 Responses to “अनुगूँज: आदमी सौ के ऊपर और पोस्‍ट चार”

  1. You invited so called “senior bloggers” only, most of the bloggers consider themselves junior. It is foolish to devide the bolgsphere in senior and junior, who classifies as senior, who as junior, is it age or years in blogging or number of posts…
    expect only so called seniors (by the way, most of them are missing since years, no posts on blogs) to write… and be happy… :) :)

  2. राजेश्वर साहब, मैं नहीं मानता कि ऐसा है जैसा आप कह रहे हैं, यानि कि सिर्फ़ सीनियर ब्लॉगरों को बुलाया तो इसलिए जो अपने को सीनियर नहीं मानते वे नहीं लिख रहे!! यदि ऐसा है तो फ़िर अच्छा ही है कि वे लोग नहीं लिख रहे, क्योंकि उन्हें अनुगूँज के बारे में पता ही नहीं कि यह कोई गूगल की Gmail की तरह invite only वाला मामला नहीं है, इसमें कोई किसी को आमंत्रित नहीं करता, यह एक खुला मंच है जिसमें कोई भी भाग लेने को स्वतंत्र है!!

  3. यहाँ मामला राजनीति से संबंधित है। राजनीति में चुनाव भी होता है। चुनाव में नेता लोग नामाँकन आखिरी दिन कराते हैं। इसीलिये अभी तक कम लोगों ने लिखा होगा। सीनियर ब्लागर जैसी कोई प्रजाति है ही नहीं यहाँ। अभी जुमा-जुमा दो साल हुये हैं ज्यादातर लोगों को लिखना शुरु किये। इतने में तो ‘प्रोबेशन पीरियड ‘नहीं पूरा होता। लिखिये राजेश्वरजी ,लिखिये। बाकियों को भी उकसाइये लिखने के लिये। सप्ताहांत का इससे बढ़िया उपयोग क्या हो सकता है!

  4. देखो राजनीति कितनी गंदी हो गई है.

    राजनीति के नाम से ही सीनियर जूनियर जैसा भेद दिखने लगा, जबकि संभवतः यह बात अभिवादन के बतौर ही कही गई होगी.

    भाई, यह तो मात्र एक उद् बोधन था, चिट्ठाकारों में कोई सीनियर जूनियर जाति धर्म नहीं होता.

    होता हो तो कोई मुझे बताए?

  5. मेरी प्रविष्टि।

  6. […] राजनीति में राजनीति **-** राजनीति सचमुच एक गंदा शब्द हो गया है. अत्यंत गंदा. बदबूदार और सड़ता हुआ. अब देखिए कि इसका नाम आते ही अनुगूंज और चिट्ठाकारो में सीनियर-जूनियर का लफड़ा पैदा हो गया. अब कोई बताए कि चिट्ठाकारों में कोई सीनियर जूनियर है भी? चिट्ठाकारों का जाति-धर्म है भी? चिट्ठाकार अपने विचारों में भिन्न हो सकते हैं, मानव के रुप में कभी नहीं. उनमें कभी कोई किसी प्रकार का लेबल नहीं लग सकता. […]

  7. मेरी प्रविष्टि देखें-
    http://hindini.com/ravi/?p=191

  8. @राजेश्वर साहब: अमित, अनुपजी और रवि जी ने सब कुछ साफ कर दिया है, किसी को सीनियर संबोधित करना व्‍यक्‍तिगत होता है जो कि अभिवादन के तौर पर कही गई है या कहते हैं। आप चाहें तो आप भी लिख सकते हैं, अच्‍छा होता अगर आप लिखते हैं तो अपने ब्‍लोग का लिंक छोड़ देते। तो आप लिख रहे हैं ना :)

  9. tarun ji, thanks for the clarifications, ravi ji and anoop ji are also real gentlemen, i don’t write(many reasons), only read blogs.. and i read since last many many days (nearly more than an year), i wrote what i wrote because i felt that, i wanted to read some stuff but saw none writing… i found some people hae friendship with some only.. and only few people are truly “global” in blogsphere like anoop shukla or jitu. i also disliked paricharcha because it took toll out of blogging which is bad for true reader like me… any way.. in the last to amit… pls learn to keep cool, it will help u..

  10. तरुण भाई, यह रही मेरी प्रविष्टि - http://www.hindiblogs.com/hindiblog/2006/06/blog-post.html

  11. माननीय राजेश्वर जी

    आपका कुछ नींव की ईंटो से परिचय कराना चाहूँगा
    १ देवाशीष जिन्होने बुनोकहानी, अनुगूँज , चिठ्ठा विश्व, ईंडीब्लागीज एवार्ड को जन्म दिया , वे भी ग्लोबल ब्लागर कहलाये जाने के हकदार हैं
    २. पँकज नरूला जिन्होने अक्षरग्राम की स्थापना की, वे भी ग्लोबल ब्लागर कहलाये जाने के हकदार हैं
    ३. रमन कौल जो बहुपयोगी सर्वज्ञ सँभालते हैं , वे भी ग्लोबल ब्लागर कहलाये जाने के हकदार हैं
    ४. ईस्वामी जिन्होनें हग नामक आनलाइन हिंदी संपादित्र बना डाला वे भी ग्लोबल ब्लागर कहलाये जाने के हकदार हैं
    ५. पाठशाला के पँकज बेंगानी भी हिंदी का महान हित कर रहे हैं।
    ६ सुनील दीपक जी जो हमें सारी दुनिया की सैर कराते हैं , व जल्द हि एक नये अवतार में नजर आयेंगे वे भी ग्लोबल ब्लागर कहलाये जाने के हकदार हैं
    ७. अँत में हनुमान भक्त हेमत शर्मा न होते तो हम हिंदी कैसे लिखते? http://akshargram.com/nirantar/0405/samvaad

    अब देखिये जीतू और फुरसतिया जी को को मिलाकर हिंदी ब्लागजगत के नवरत्न मैने गिना दिये कि नही?

    बकिया बची परिचर्चा तो अपना मानना है ” भईये पसँद हो तो करो चर्चा वरना लिखो ब्लाग पर पर्चा”

  12. अरे बड़ी भूल हो गयी। हिंदी ब्लागिंग के आदिपुरुष आलोक जी और रवि रतलामी जी जो रचनाकार के रचयिता हैं उन्हे भी ग्लोबल ब्लागर की श्रेणी में सम्मिलित कर लें। अब हो गईं ग्यारह विभूतियाँ।

  13. कृपया मेरी प्रविष्टी य़हां देखें ।

    http://soniratnablogspot.com

  14. Atul ji, dhanyavad, you can count as many names as you want.. 11 and add yourself as well, so 12.. to a reader like me, how does it affect, if many of them don’t write at all.. when i used “Global”, I meant to say connectivity.. how much connected you are with other bloggers, you can guage your connectivity by number of comments you get.. tell me how many comments you got on your last post… how many posts on you comment…

  15. i know that you don’t have mouth to reply

  16. […] पर्चे अभी भरे ही जा रहे थे कि रविजी ने हल्का सा एक छींटा फेंक दिया “राजनीति सचमुच एक गंदा शब्द हो गया है. अत्यंत गंदा. बदबूदार और सड़ता हुआ. अब देखिए कि इसका नाम आते ही अनुगूंज और चिट्ठाकारो में सीनियर-जूनियर का लफड़ा पैदा हो गया. अब कोई बताए कि चिट्ठाकारों में कोई सीनियर जूनियर है भी? चिट्ठाकारों का जाति-धर्म है भी? चिट्ठाकार अपने विचारों में भिन्न हो सकते हैं, मानव के रुप में कभी नहीं. उनमें कभी कोई किसी प्रकार का लेबल नहीं लग सकता.”। […]

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