अनुगूंज में चुटकुलों की गूंज

अब, जब अघोषित रुप से अनुगूंज में चुटकुलों की गूंज के लिए कुछ प्रविष्टियाँ प्राप्त हो ही गई हैं, तो मैं विधिवत् रूप से, अगले, 21वें अनुगूंज की घोषणा करता हूँ.

अनुगूंज में चुटकुलों की पहली गूंज की गर्जना करने पर विनोद मिश्र जी तथा नितिन बागला जी को रचनाकार का धन्यवाद.

यह आयोजन रचनाकार की तरफ से होगा. चुटकुले, चिट्ठाकार चाहें तो अपने चिट्ठा स्थल पर प्रकाशित कर सकते हैं या सीधे rachanakar@gmail.com को भेज सकते हैं. चुटकुले प्राप्त होते ही उन्हें रचनाकार में उनके नाम सहित-साभार प्रकाशित किया जाएगा.

इस अनुगूंज में हम प्रयास करेंगे कि चुटकुलों का एक संग्रह बने जिसमें कम से कम (अधिक हों तो क्या बात है!) 1001 प्रविष्टियाँ हों. यह अक्षरग्राम पर तो रहेगा ही, इसे विकिपीडिया में भी डाला जाएगा तथा इसे पीडीएफ़ ई-बुक फ़ॉर्मेट में भी इंटरनेट पर प्रकाशित किया जाएगा.

तो आप सभी चिट्ठाकार बंधुओं से रचनाकार का निवेदन है कि आगे बढ़कर एक से एक चुटकुले अपनी स्मृतियों से, अपनी डायरी से या सुरक्षित रखी हुई चुटकुलों की किताबों से खोद लाएँ व रचनाकार को शीघ्र प्रेषित करें. हर तरह की चुटकुलों का स्वागत है - वयस्क-अवयस्क, सरदार-असरदार, लाला-लालू, बुश-मोनिका, सोनिया-सानिया यानी कि हर कल्पनीय विषयों के चुटकुलों का स्वागत है.

रवि
(रचनाकार के लिए )

12 Responses to “अनुगूंज में चुटकुलों की गूंज”

  1. …..एक से एक चुटकुले अपनी स्मृतियों से, अपनी डायरी से या सुरक्षित रखी हुई चुटकुलों की किताबों से खोद लाएँ …

    और, इंटरनेट तो है ही चुटकुलों का भंडार. बस, हिन्दी (यूनिकोड) में नहीं है.

  2. लो जी आपने समयकाल तो बताया ही नहीं अनुगूजँ का, अंतिम दिनांक बताईये. और अभी तक पीछली अनुगूजँ का अवलोकन भी नहीं आया हैं.
    लेकिन आयोजक महोदय हमारी बधाई स्वीकारें, विषय ऐसा हैं कि यह सबसे सफल अनुगूजँ साबित होगी. इस बार एक से अधिक प्रविष्टीयों कि अनुमति दी जानी चाहिए ताकि एक दो राउंड में ज्यादा से ज्यादा लतिफे भेजे जा सके.

  3. …लो जी आपने समयकाल तो बताया ही नहीं अनुगूजँ का, अंतिम दिनांक बताईये. और अभी तक पीछली अनुगूजँ का अवलोकन भी नहीं आया हैं….

    पिछली अनुगूंज का अवलोकन आगे पीछे आना ही है, इस अनुगूंज का समय 1 जुलाई से 15 जुलाई रहेगा.

    और, इस अनुगूंज में चाहे आप जितनी , जी भर प्रविष्टियाँ लिख सकते हैं. बस, रचनाकार को तथा इस स्थल पर खबर देते रहिए.

    … आयोजक महोदय हमारी बधाई स्वीकारें, विषय ऐसा हैं कि यह सबसे सफल अनुगूजँ साबित होगी…

    :)

  4. रवि जी,

    यदि सम्भव हो (यह तो आप ही जानेंगे कि किस प्रकार) तो दो सुझाव -
    1- वर्गीकरण (उदाहरणत: आपके द्वारा दिये गयी श्रेणियाँ)
    2- कोई प्रावधान जिससे चुटकुलों की पुनरावृत्ति न हो
    कदाचित यह आसान नहीं होगा, परंतु गुणीजन शायद कोई उपाय खोज लें।

  5. वर्गीकरण यदि संभव हुआ तो अवश्य किया जाएगा.

    चुटकुलों की पुनरावृत्ति की संभावना कम है. आमतौर पर एक ही चुटकुला दो व्यक्तियों द्वारा दो भिन्न तरीके से ही पेश किया जाता है.
    फिर भी, एक जैसे चुटकुलों की छंटाई की कोशिश करेंगे ही

  6. मैने अब तक दो अनुगूंजों में भाग लिया (१९वीं और २०वीं) पर अवलोकन जैसी कोई प्रक्रिया को अब तक मैने लक्षित नही किया। कहीं ऐसा तो नही कि अवलोकन हुआ और मुझे दृष्टिगोचर नही हुआ। क्या अवलोकन के लिये कोई समय सीमा निर्धारित नही? क्या अवलोकन की सूचना हर भाग लेने वाले तक पँहुचती है? मेरे प्रश्नों का अर्थ यही है, कि यदि संभव नही, तो अवलोकन की अनिवार्यता समाप्त कर दी जानी चाहिये।

  7. मैने भी अपनी प्रविष्टि भेज दी है | यहाँ देखें :
    http://pratibhaas.blogspot.com/2006/07/blog-post.html

  8. हमारी प्रविष्टी यहाँ रख दी गई हैं :
    http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=55
    साथ ही एक सुझाव हैं जो भी चिट्ठाकार प्रविष्टी लिखता हैं वह अपने लतिफे के उपर शिर्षक लगा दे जैसे की पति-पत्नि, गुरू-शिष्य, आदी… इस से अंत में संग्रह को वर्गीकृत करने में आसानी रहेगी.

  9. […] अनुगूँज सामूहिक ब्लॉग चर्चा का एक अनूठा और नियमित प्रयास है। लगभग मासिक, प्रत्येक अनुगूँज एक नए विषय पर सभी चिट्ठाकारों के विचार या प्रविष्टियाँ आमन्त्रित करती है, जिसे वे अपने-अपने चिट्ठों पर छापते हैं। अंत में संयोजक या मेज़बान सभी प्रविष्टियों का एक संकलन प्रस्तुत करते हैं। इस बार की अनुगूँज का विषय है - लतीफ़े यानि चुटकुले। रवि द्वारा संयोजित इस अनुगूँज का लक्ष्य है १००१ चुटकुले इकट्ठे करना। प्रयास जारी है। अभी तक जुड़े लतीफ़ों में से कुछ देखें तो लगता है बड़े मज़े की चीज़ बनने वाली है। […]

  10. वायदे अनुसार मैने भी अपनी प्रविष्टि भेज दी है | यहाँ देखें :

    http://www.readers-cafe.net/nc/?p=72

  11. […] गुंडो से दुनिया डरती है। हम भी डरे या न डरें लेकिन डरने का बहाना जरूर करते हैं। लिहाजा रवि रतलामी से डर कर कुछ चुटकुले टाइप कर रहे हैं। खुदा झूठ न बुलाये जितने चुटकुले टाइप किये उससे कहीं ज्यादा जब्त करने पड़े काहे से कि वे सारे हास्टल बिरादरी के हैं। बहरहाल यहां जो चुटकुले हैं उनमें से पहले २० चुटकुले हमने भारतेंन्दु हरिशचन्द्र रचनावली से लिये हैं। खासकर यह बताने के लिये कि आज से १०० साल से भी कुछ पहले किस तरह के चुटकुले चलते थे। उनमें से कुछ आज भी चलते हैं-अंदाज बदलकर। […]

  12. sabhi bhrataon ko mera sadar pranam

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