निरंतर जनमंच - हमारा भारत कैसा हो?

आप सबको तो पता ही है कि हम अपनी पत्रिका निरंतर का प्रकाशन फिर से करने जा रहे हैं। निरंतर का अंतिम अंक अगस्त, २००५ में निकला था। यह संयोग ही है अब इसका फिर से प्रकाशन अगले माह से होने की संभावना है।

सुखद संयोग यह भी है कि अगस्त २००६ को ही हमारे देश की स्वतंत्रता का हीरक जयंती वर्ष है। इस अवसर पर हम चाहते हैं कि आप सभी सुधी चिट्ठाकार अपने देश के बारे में अपने विचारों से हमें अवगत करायें कि हमारा भारत कैसा हो? देश के किस दिशा में बढ़ने को सबसे आवश्यक मानते हैं आप? देश का राजनैतिक नेतृत्व, नौकारशाही, व्यापारी, वैज्ञानिक, तकनीशियनों की किस रूप में कल्पना करते हैं आप? हमारे संविधान, सामाजिक व्यवस्था, शिक्षा के ढाँचे में किस तरह बदलाव की तमन्ना रखते हैं आप? देश की किस समस्या को आप सबसे अहम मानते हैं तथा उसे किस तरह हल करना चाहते हैं?

हमें अपने विचार तुरंत लिख भेजें। हालांकि शब्द सीमा बांधना आपके ऊपर बंधन लगाना जैसा होगा लेकिन प्रयास करें कि १५०-२०० में अपने विचार भेजें। अगर कुछ ज्यादा लिखने का मन करे तो झिझकें नहीं लिख डालें तथा हमें भेज भी दें। हम अपने हिसाब से सार ग्रहण कर लेंगे। सारे सुधी पाठकों के विचार हम अपनी और आप सबकी पत्रिका निरंतर में जनमंच स्तम्भ के अंतर्गत प्रकाशित करेंगे।

आपसे हमारा अनुरोध है कि आप हमें अपने विचार anupkidak at gmail dot com पर भेजें। कृपया ध्यान दें कि आप अपनी प्रविष्टि अपने ब्लॉग या किसी अन्य जालस्थल पर निरंतर में प्रकाशन के १५ दिन उपरांत ही प्रकाशित कर सकेंगे।

अपने विचारों के साथ अपना परिचय तथा संभव हो तो फोटो भी भेज दें। अगर आपका अपना कोई ब्लॉग नहीं है तो भी झिझके नहीं लिखकर हमें भेजें। हमें आशा है कि आप अपने विचार सप्ताह भर के भीतर यानि २२ जुलाई तक भेज देंगे ताकि हम उनको अपने अगस्त अंक में शामिल कर सकें। तो अपना कम्प्यूटर आन कीजिये तथा लिखना शुरू करिये न! विवरण फिर से :-

  • पत्रिका- निरंतर
  • स्तम्भ- जनमंच
  • विषय- हमारा भारत कैसा हो?
  • शब्द सीमा-आप समझें लेकिन हो सके तो 150-200 शब्द।
  • भेजने की अंतिम तिथि- 22.07.2006
  • पता- anupkidak at gmail dot com
  • कौन भेज सकता है- कोई भी जो इस पोस्ट का पाठक है।
  • 4 Responses to “निरंतर जनमंच - हमारा भारत कैसा हो?”

    1. क्या बात है, वाह

    2. १५ अगस्त का समय और ‘हमारा भारत कैसा हो’ जैसा विषय! क्या जोडी बनायी है! बहुत अच्छे!!

    3. […] अगस्त अंक के लिये तो पाठकों आप जानते ही होंगे कि विषय है “मेरा भारत कैसा हो?” अगस्त २००६ में हम अपना ६०वाँ स्वाधीनता दिवस मनाने जा रहें हैं सो इससे बेहतर विषय भला और क्या होता! विस्तृत सूचना के लिये पढ़ें अनूप की अक्षरग्राम पर घोषणा। अगर आपने अभी तक अपनी राय न भेजी हो तो आज ही हमारे ईमेल पते patrikaa at gmail dot com पर भेजें। […]

    4. […] फिर और लोगों ने भी बताया कि पत्रिका बहुत अच्छी लगी। पिछली के मुकाबले बहुत सुधार है। कुछ लोगों ने लेखों में अपनी टिप्पणियां भी दी हैं। फिलहाल तो अभी तक टिप्पणियाँ लिखने वालों में लगभग सभी लोग हमारे साथी चिट्ठाकार हैं। नये लोगों तक शायद अभी यह पत्रिका पहुँची नहीं या पहुँची भी तो लोगों ने अभी तक अपनी प्रतिक्रिया दी नहीं। वैसे भी मुझे लगता है कि हिंदी के ज्यादातर पाठक प्रतिक्रिया देने में कुछ संकोची या ज्यादा सही होगा यह कहना कि मुँहचुप्पा होते हैं। पढ़ लेगें लेकिन उस पर अपनी राय नहीं बतायेंगे। अपने विचार रखने के पहले लगता बहुत विचार करते हैं। जनमंच पर जब हमने अपने ‘हमारा भारत कैसा हो?’ पर विचार लिखने के लिये कहा तो केवल दो प्रतिक्रयायें मिलीं। […]

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