विकल्पहीन नहीं है दुनिया ब्लागिंग की
जैसी कि खबर मिली है कि कुछ साथियों को अपने ब्लाग पोस्ट करने में असुविधा हो रही है। कारण जो भी हो लेकिन फिलहाल अड़चन है।
आलोक ने कुछ वैकल्पिक सुझाव बताये हैं। जीतू ने भी बताया है।
ये दोनों तकनीकी महारथी हैं। मैं अपने जैसे तकनीकी रूप से सामान्य साथियों को सुझाव देता हूँ कि अपना लिखना स्थगित न करें। यहाँ चौपाल पर लिखते रहें। जिन लोगों के पास अक्षरग्राम का पासवर्ड नहीं है वे चौपाल के सरपंच पंकज जी से अनुरोध करें।
अगर पंकज को कुछ तकनीकी समस्या है ,एक सीमा से अधिक लोगों को अनुमति न दे पाने की,तो आगे मेरा यह सुझाव है कि साथी लोग अपनी पोस्ट मेरे पास भेजें anupkidak at gmail dot com पर मैं उसे अक्षरग्राम पर पोस्ट कर दूंगा। जब उनके ब्लाग की सेवायें बहाल हो जायें तो वे अपने-अपने ब्लाग पर लिखने लगें। वैसे भी चौपाल का महत्व परेशानी आने पर ही पता चलता है।
मेरे अलावा दूसरे साथी भी इस पोस्टिंग यज्ञ में हाथ बँटा सकते हैं।
तो शुरू करिये न पोस्ट करना,मेल भेजना
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




भई, निराश ना हों।
यदि किसी भाई का ब्लॉग नही खुल रहा है तो आइए उत्तरा है ना, रजिस्टर कीजिए और लिखिए अपने मन की बात।
रही बात ब्लॉगस्पाट वाली तो कुछ दिनों मे समस्या का निदान हो ही जाएगा। अगर कोई साथी ब्लॉगस्पाट से वर्डप्रेस डाट काम पर शिफ़्ट करना चाहता है तो हमारी सेवाए नि:शुल्क उपलब्ध है। किसी भी समस्या के समाधान के लिये मै एक चैट मैसेज की दूरी पर हूँ।
लिखने के लिए कोई बंधन नहीं है. ब्लॉगर डोमेन जहाँ डैशबोर्ड से लिख सकते हैं व प्रकाशित कर सकते हैं, उस पर प्रतिबन्ध नहीं है.
प्रतिबन्ध ब्लॉगस्पॉट पर है जहाँ से हमारे चिट्ठे प्रकाशित होते हैं.
हल्ला इतना मच रहा है कि प्रतिबन्ध लगाने वाले बेवकूफ़ों को शीघ्र ही अकल आएगी. ऐसी उम्मीदें हैं.
हड़बड़ी में ब्लॉग शिफ़्ट करना समझदारी नहीं है. बाद में भी ऐसे सरकारी बंधन किसी भी - जी हाँ, किसी भी डोमेन में लगाए जा सकते हैं.
इस लिए लिखें, प्रकाशित करें आराम से. और यह बंधन सिर्फ भारतीय आईएसपी ने लगाया है. तमाम दुनिया के लोग तो आपका लिखा पढ़ेंगे ही.
वैसे भी मेरा लिखा तो ज्यादातर बाहरी देश के लोग पढ़ते हैं
मैं उमेश, नेपालसे। नेपाली भाषाका पहला ब्लगर हुँ।
भारत सरकारका अभिव्यक्ति स्वतन्त्रताका ये हनन् मुझे राजा ज्ञानेन्द्र के समय के हरकतोंको याद दिलाती है। उस समय माअोवादी ‘आतंककारी’ यों के युज के बहाने हमारे सरकार ने मोबाइल फोन व ल्यान्डलाइन फोन तक काट दिया था।
मैं भारतीय ब्लगरोँ के साथ हुँ। अगर कुछ सहयोग चाहिये तो जरुर लिखना।
Blogspot.com ki dikkat kafi jaldi thheek huin.Badhai.
25 july 2006 at 6;40
aaj jab main uthi to dekha kidin nikal aaya haiaur bacce skul jane ki teeyari kar rhe hain unke aato aagye hainaur hmare samne ka skul bhi khul gya hai aur dhud wala bhi aane vala hai.
aesa lua ki aaj jane mujhe kya ho gya mera kisi kam main man nahi laga oho mujhe laga aaj to dipty ka birth day hai main usko wish karne ke lia phone kiya to vh skul ja chuki thi muje bhut bura lga par kya kar sakti thi.subh der se uthne se mera sara rutin bigr gyatha.
aaj main ne duniya main kdm rakha aesa lga jese duniya meri muthi main hai kya hai ye duniya smjh hi nhin aata ki aaj teknoloji khan phuch ge hai.aaj aadmi kuch bhi kar skta hai lekin parkrti ke sath chechar nahi karni chahiye.nature ko dekhne main bahut maja aata hai
kvita -
amir jra gribi main ji kar dekh
kitna muskil hai ye jivn
amir jra gribi main ji kar dekh
kitna lachr hai ye grib
sbki khbr lene vale chep kyon ho
kitne dukhi hain ye garib
amir kuch pal bhukh sah
amir jra gribi main ji kar dekh
sbhi ko bhagvan tune sman bnaya
magar hamne fark bnaya
amir jra garib main ji kar dekh