इन्टरनैट पर सम्पूर्ण रामायण
Posted on जुलाई 24th, 2006 द्वारा जीतेन्द्र
साथियों मुझे बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि श्री रामचरित मानस को सम्पूर्ण रूपेण यूनिकोड मे इन्टरनैट पर उपलब्ध करा दिया गया है। इस संकलन मे मुझे भाई रवि रतलामी और अनूप शुक्ला का बहुत बहुत सहयोग प्राप्त हुआ। इनके भागीरथी प्रयासों की ही वजह से आज यह संकलन पूर्ण रूप मे आपके सामने प्रस्तुत हो सका है।
साथ ही मै बताना चाहूंगा कि श्रीरामचरित मानस का संकलन अपने पुराने स्थान से उठकर अपने नये पते पर पहुँच गया है। आप सभी साथियों से निवेदन है कि अपने सुझाव एवं आलोचनाए नए पते पर दें।
धन्यवाद
जीतेन्द्र चौधरी
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




वाह
बधाई ! कई लोग यूनिकोडित हिन्दी में रामचरित मानस खोज रहे थे। उनकी मनोकामना भी पूरी हुई।
पर इसका ‘खोज’ वाला टूल काम नहीं कर रहा क्या?
बहुत धन्यवाद जीः हमें कई दिनों से जिसकी तलाश थी वो यहां मिल गई और भी युनिकोड मे