विकीपीडिया पर लेख डालने और ढापने के बारे में
विकीपीडिया के बारे में अधिकतर लोग जानते हैं। यहाँ पर कोई भी लेख डाल सकता है, और लेख उठा सकता है - लेकिन मुक्त प्रलेखन अनुमति पत्र (एफ़ डी एल) के तहत।
विकीपीडिया का किसी भी तरह इस्तेमाल करने के पहले इस अनुमतिपत्र को ध्यान से पढ़ें। ये न सोचें कि क़ानून लागू कैसे होगा, हमें कौन पकड़ेगा। यहाँ पकड़े जाने की बात नहीं है, आपकी हैसियत और साख की है। यह बात योगदाताओं के ऊपर भी लागू होती है और प्रयोक्ताओं पर भी।
सार के तौर पर कुछ बातें -
योगदाताओं के लिए
यदि आपको अपने लेख से बेइन्तहाँ मोह है, यदि आप उसपर हमेशा अपने नाम का ठप्पा देखना चाहते हैं तो कृपया विकीपीडिया पर अपना लेख न छापें। विकीपीडिया में लेख देने का मतलब है कि आप का उस पर स्वामित्व नहीं रहा। हाँ, उस लेख का आगे प्रयोग करने वाले भी उस लेख के स्वामी नहीं है।
विकीपीडिया के लेखों की प्रतियों के बारे में एफ़डीएल क्या कहता है -
अ.३. २. शब्दशः प्रति बनाना
आप दस्तावेज़ की किसी भी माध्यम में प्रतिलिपि बना सकते हैं और वितरित कर सकते हैं, व्यावायसायिक व अव्यावसायिक, दोनो ही तौर पर, बशर्ते कि यह अनुमति पत्र, सर्वाधिकार सूचिकायें, और अनुमति पत्र सूचिका, जिसमे यह लिखा हो कि यह अनुमति पत्र दस्तावेज़ पर लागू होता है, सभी प्रतियों में शामिल किया जाता है, और इस अनुमति पत्र की शर्तों के अलावा आप और कोई शर्त न जोड़ें। अपनी वितरित प्रतियों पर आप किसी प्राविधिक तरीके से पढ़ने या पुनः प्रति बनाने पर बाधा या नियन्त्रण नहीं डाल सकते हैं। लेकिन आप प्रतियों के एवज में हर्जाना स्वीकार कर सकते हैं। यदि आप काफ़ी अधिक मात्रा में प्रतियाँ वितरित करते हैं तो आपको विभाग 3 की शर्तों का भी पालन करना होगा।
ऊपर वर्णित शर्तों के अनुसार ही आप प्रतियाँ उधार दे सकते हैं, और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन भी कर सकते हैं।
प्रतिलिपि बना के वितरित करने वालों के लिए - यह भी देखें कि यह एफ़डीएल का इस्तेमाल अपने लेखों में कैसे करें -
किसी स्वलिखित दस्तावेज़ में इस अनुमतिपत्र का प्रयोग करने के लिये, दस्तावेज़ में इस अनुमति पत्र की एक प्रति जोड़ें और शीर्षक पृष्ठ के तुरन्त बाद यह सर्वाधिकार व अनुमति सूचना जोड़े:
सर्वाधिकार © वर्ष आपका नाम।
इस दस्तावेज़ को प्रतिलिपित, परिवर्तित और/या वितरित करने की अनुमति ग्नू मुक्त प्रलेखन अनुमति पत्र अनुरूप या मुक्त तन्त्रांश संस्था द्वारा प्रकाशित किसी भी बाद के अनुरूप के तहत दी जाती है; इसके तहत अपरिवर्तनीय विभाग हैं उनके शीर्षकों की सूची दीजिये, अग्र आवरण पाठ्य हैं उनके शीर्षकों की सूची दीजिये, और पृष्ठ आवरण पाठ्य हैं सूची। “ग्नू मुक्त प्रलेखन अनुमति पत्र” शीर्षित विभाग में अनुमित पत्र की एक प्रति शामिल है।.
यदि आपके कोई सवाल हों तो पूछें, ध्यान रहे कि बतौर लेखक आप ऐसे दावे न करें जो वाजिब न हों, और बतौर वितरक आप ऐसा वितरण न करें जो उपयुक्त न हों। यह आपकी साख की बात है। उपरोक्त बातें लेख की सभी प्रतियों पर लागू होंगी, चाहे उसका प्रकाशक कोई भी हो - मूल लेखक पर भी यह लागू होंगी और प्रतिलिपि करके वितरित करने वाले पर भी।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




ये जानकारी काम की है। अब इस पर आगे अमल होगा।
Hi,
I am creating a new blog in which some of the posts would be in Hindi. Just like you, I am also using WordPress and K2. I can’t get the posts to render correctly in Firefox, especially the headings of the posts.
Could you please help me in this regard? I am sorry for writing this post in English but my Hindi typing speed is very slow. I would try to write the next post in Hindi.
Thanks in advance,
Mohib
मोहिब,
फॉयरफॉक्स व हिन्दी पर इस कड़ी पर जा कर देखें, आपकी उलझन दूर होगी
http://www.akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?id=16
पंकज
बहुत शुक्रिया, पंकज साहब | आप मेरी वेब-साइट www.jagjitsingh.info पर देख सकते हैं | सुझावों का इन्तिज़ार रहेगा |
मुहिब