वागर्थ में प्रत्यक्षा की कहानी

वागर्थ के अगस्त ,२००६ अंक में हमारे ब्लागजगत की जानी-पहचानी लेखिका तथा निरंतर की संपादक मंडली की सदस्या  प्रत्यक्षा की कहानी छपी है। प्रत्यक्षा जी को बधाई देते हुये यह अनुरोध है कि अपनी कहानी को कालर ऊँचा करके अपने ब्लाग में भी पोस्ट कर दें ताकि वह जनता भी जनार्दन इसे पढ़ सके जिसके पास तक वागर्थ पहुँचना मुश्किल है।

5 Responses to “वागर्थ में प्रत्यक्षा की कहानी”

  1. भई वाह! प्रत्यक्षा जी को बधाईयाँ!

  2. प्रत्यक्षा जी को हमारी तरफ से भी बधाई - उम्मीद है वोह अपने ब्लॉग पर हमें भी कहानी पढने देंगे :)

  3. [...] [हमने बताया था कि हिंदी की प्रख्यात साहित्यिक पत्रिका वागर्थ के अगस्त ,२००६ अंक में हमारे ब्लागजगत की जानी-पहचानी लेखिका तथा निरंतर की संपादक मंडली की सदस्या प्रत्यक्षा की कहानी छपी है। कुछ लोगों ने इसे पढ़ना चाहा है। वैसे कहने को तो वागर्थ कहने को तो आनलाइन पत्रिका है लेकिन महीनों से पुराना अंक लगा है वहाँ। बहरहाल यहाँ पेश है प्रत्यक्षा जी कहानी-सीढियों के पास वाला कमरा। जानकारी के लिये बता दें कि कहानी में एक जगह अमलताश के फूल लाल बताये गये हैं जिसे वागर्थ वालों ने लाल ही रहने दिया है। यह नमूना है इस बात का कि प्रूफ की गलतियाँकरने का अधिकार सबको है।] [...]

  4. बधाई प्रत्यक्षा जी आप का लेख छपा और अनूप जी आप जानकारी देने के लिये बधाई पा्त्र है

  5. i want to learn south Indian delicacies. Can u help me

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