हिन्दी चिट्ठाकारी को आमजन तक पहुँचायें
पिछले दिनों हिन्दी चिट्ठाकारी पर जयप्रकाश मानसजी का लेख एक पत्रिका में पढ़ा। साथ ही खयाल आया कि क्यों न हम सभी चिट्ठाकार मिलकर एक आम इंटरनेट प्रयोगकर्ता तक हिन्दी चिट्ठा लेखन की जानकारी पहुँचायें। इसके लिए अखबार और पत्रिकायें अच्छा माध्यम हो सकती हैं। प्रतीक पांडे भी पहले ‘कादम्बिनी’ और ‘हरिभूमि’ में हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में लिख चुके हैं। अखबारों में भी कभी-कभार इस प्रकार के लेख आ जाते हैं पर फ़िर भी आम पाठक को इसकी बहुत कम समझ है। और इंटरनेट पर हिन्दी को समृद्ध बनाने और कुछ अच्छे लेखकों को इससे जोड़ने के लिए उन तक चिट्ठाकारी की जानकारी पहुँचनी आवश्यक है।
इसलिए मेरा आग्रह है कि सभी चिट्ठाकार अपने आसपास और परिचित के अखबारों और पत्रिकाओं में इस बावत् लेख लिखें जिससे आम इंटरनेट प्रयोगकर्ता भी हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में जानकर इसके माध्यम से खुद को अभिव्यक्त कर सके। वैसे अखबारों के अलावा और भी माध्यम हो सकते हैं जैसे कि अनुरागजी अपने रेडियो के माध्यम से लोगों को इस बारे में जानकारी देंगे। तो फ़िर हो जाईये इस पुनीत कार्य में शामिल।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




How to write in Hindi fonts in this box. whenever i know very well how to type.
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