च्ररखा और लिनक्स
संगणक प्रोद्योगिकी के क्षेत्र मे हमेशा एक बहस छीडी रहती है कि कौनसा आपरेटींग सिस्टम बेहतर है विडोज़ , लिनक्स या मैक। मैं लिनक्स का समर्थक हूँं, सिर्फ इसलिये कि यह एक मुक्तश्रोत साफ्टवेयर है। यह तकनीकी रूप से बेहतर है या नही यह एक विवाद का विषय है। इस लेख का उद्देश्य इन तीनों के तकनीकी गुण दोषो की चर्चा नही है। उद्देश्य है लिनक्स और मुक्त श्रोत आंदोलन की महत्ता और उसका भविष्य पर एक बहस छेडने का !
जब भी मैं लिनक्स की सोचता हूँ मुझे याद आती है गांधीजी के सत्याग्रह आंदोलन की और चरखे की। इस आंदोलन मे चरखा एक प्रमुख हथियार के रूप मे उभरा था। चरखा प्रतीक था आत्मनिर्भरता का, विदेशी वस्तुओ के बहिष्कार के आंदोलन का। समय की जरूरत थी कि हम अपनी पूंजी विदेश जाने से रोंके, उससे बड़ी जरूरत थी कि हम अपने कुटीर उद्योगो जो भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हुआ करते थे बर्बाद होने से रोके। चरखे से सूत कात कर उससे बने कपड़े पहनना एक कदम था आत्मनिर्भरता की ओर, स्वदेशी वस्तुओ के उपयोग की ओर !
लेकिन क्या एक चरखा ब्रिटिश साम्राज्य को हिला सकता था ? उसे उखाड फेंकने मे कितना मददगार था ? ये हर कोई जानता है कि एक साधारण चरखे की बदौलत ये संभव नही था। इसके लिये जनता के सामूहिक प्रयास की जरूरत थी, नेताओं और जनता को एक मंच पर लाने की जरूरत थी। चरखा इसके लिये एक मजबूत प्रतीक , एक हथियार के रूप मे उभरा था। आम आदमी ने यह महसूस किया था कि स्वत्रंता , आत्मनिर्भरता उनके सुखी जीवन के लिये कितनी जरूरी है। एक चरखे ने आम जनता को ये दिखाया था कि स्वतंत्रता आंदोलन उनके अपने हितों के लिये लढा जा रहा है। चरखा एक प्रतीक था, इस आंदोलन का !
लिनक्स आज वही भूमिका अदा कर रहा है जो चरखे ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मे निभाई थी। यह भी एक प्रतीक बन गया है, बड़ी साफ्टवेयर कंपनीयो की एकाधिकारवादी मनोवृत्ती के विरुद्ध संघर्ष का। संगणक प्रोद्योगिकी विकास के लिये एक जरूरत है लेकिन इसकी उंची कीमत इसकी राह मे एक बड़ा रोड़ा है। मुक्त श्रोत आंदोलन इसका एक हल है। मुक्त श्रोत आंदोलन की सफलता के लिये जरूरी है कि मुक्त श्रोत साफ्टवेयर का प्रयोग किया जाये। लिनक्स इस संघर्ष मे एक सफल योद्धा के रूप मे उभरा है। चरखा तो एक प्रतीकात्मक रूप मे सफल था लेकिन लिनक्स तो एकाधिकारवादी मनोवृत्ती की कंपनीयो के उत्पादों को टक्कर दे रहा है।
एक समय था कि बाजार मे उपलब्ध संगणक का मे आपरेटींग सिस्टम किसी कंपनी के निजी श्रोत वाले ही हुआ करते थे, आज स्थिति बदल रही है। लिनक्स से लैस संगणक, लैपटॉप बाजार मे उपलब्ध है। सन माईक्रोसीस्टम जैसी कंपनीयां भी अपने आपरेटींन्ग सिस्टम सोलारीस के अलावा लिनक्स से लैस सर्वर बेच रही है। आई बी एम भी इसमे पीछे नही है।
आज हर सफल व्यावसायिक उत्पाद की टक्कर का मुक्त श्रोत उत्पाद उपलब्ध है। उदाहरण के लिये
आपरेटींग सिस्टम : लिनक्स
आफीस : ओपन आफीस
डाटाबेस : माई एस क्यु एल
मुक्त श्रोत आंदोलन वक्त की जरूरत है , आवश्यकता है इसे हमारे समर्थन की और योगदान की। आप क्या कहते है ?

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




आशीषजी सुन्दर तुलना - लिनक्स और चरखा ! माइक्रोसॊफ्ट द्वारा हमारी स्वतंत्रता के दिन-दहाड़े अपहरण के विरुद्ध, विस्टा के प्रोपेगेन्डा के पर्दाफ़ाश हेतु तथा प्रयोक्त्ता के लिए आसान -मुफ़्त- सॊफ़्ट्वेयर के लिए काम करने के लिए कुछ मित्रों ने http://badvista.fsf.org/
बनाया है। ओर्कुट पर एक समूह भी बना है : http://www.orkut.com/Community.aspx?cmm=26201201
‘नया चरखा-आन्दोलन’ हिन्दी से भी जुड़ा रहे इसके लिए जरूरी है कि हिन्दी ब्लॊगमण्डल को आप जैसे साथी अद्यतन सूचनाएं देते रहें।
[…] आशीषजी का लेख चरखा और लिनक्स देखा तो जो विचार मुझे आए उन्हे टिप्पणी के रूप में लिखता तो काफी लम्बा हो जाता अतः यहाँ लिखा है. […]
यह चर्चा शुरु करने के लिये बधाई। फायर फौक्स को क्यों भूल गये - सबसे अच्छा वेब ब्रॉउसर।
विंडोज़ विस्टा के लिए एक बढ़िया विवेचना :
Executive Executive Summary-
“The Vista Content Protection specification could very well constitute the longest suicide note in history.”
पूरा दस्तावेज़ यहाँ पढ़ें-
http://www.cs.auckland.ac.nz/~pgut001/pubs/vista_cost.html
अभी तो नहीं, पर लगता है 2020 तक आमतौर पर हर क्षेत्र में ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल में आने लगेंगे.
एक और मत:
“…
I’ve been working with Vista since its beta days, and I started using Linux in the mid-90s. There may be other people who have worked with both more than I have, but there can’t be many of them. Along the way, I’ve formed a strong opinion: Linux is the better of the two…”
पूरी कहानी इस कड़ी पर पढ़ें-
http://desktoplinux.com/articles/AT9727687530.html
चरखा और लिनक्स - बहुत ही सुंदर तुलना है आशीष भाई! किसी भी उत्पाद पर उपभोक्ता को पूर्ण नियंत्रण न देना भी एक प्रकार की स्वतंत्रता का हनन है. यह कड़ी देखिये, आज विश्व के बड़े से बडे़ सुपर कम्प्य़ूटर लिनक्स पर चल रहे है, (http://en.wikipedia.org/wiki/Image:Top500_OS.png). वैज्ञानिक शोध कार्य में भी आजकल लिनक्स का ही बोलबाला है. पिछले वर्षों में लिनक्स के बढ़ते उपयोग से यह अनुमान लगाना कतई गलत न होगा कि भविष्य लिनक्स का है.
लिनक्स को बढने के लिये इस पर ढेर सारे साफ़्टवेयर उपलब्ध होना जरूरी है. बात सिर्फ़ ओपन औफ़िस वगैरह से नहीं बनती. हर उपयोग के लिये साफ़्टवेयर हों, जो कि आज नहीं है. सुपर कम्प्यूटर, सर्वर वगैरह पर तो ठीक है पर आम आदमी के लिये जो घर घर में कम्प्यूटर हैं, उन पर लिनक्स हो. यह तभी हो सकता है कि उनके लिये हर तरह के साफ़्टवेयर उपलब्ध हों. बाज़ार में जो लिनक्स वाले डेस्कटाप या लैपटाप बिक रहे हैं वे इसलिये कि लोग उनको खरीद कर घर पर पायरेटेड विन्डोज डाल लें. यदि निर्माता इन्हें विन्डोज सहित बेचेंगे तो ज्यादा दाम पर बेचना पडेगा.
मुफ़्त- सॊफ़्ट्वेयर के लिये डेवेलपर का शुरू में तो उत्साह रहता है पर कुछ महीनों के बाद हताशा होने लगती है. लगातार सॊफ़्ट्वेयर के लिये उससे थोडी आय होना जरूरी है, चाहे वह साफ़्टवेयर से हो या किसी और स्रोत से. (एसा मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं)
यदि आप लिनक्स को आगे बढाना चाहते हैं, तो लिनक्स के लिये आम आदमी के उपयोग के लिये साफ़्ट्वेयर लाईये. जो एकदम सस्ते हों या श्रोतमुक्त हों
“…मुफ़्त- सॊफ़्ट्वेयर के लिये डेवेलपर का शुरू में तो उत्साह रहता है पर कुछ महीनों के बाद हताशा होने लगती है. लगातार सॊफ़्ट्वेयर के लिये उससे थोडी आय होना जरूरी है, चाहे वह साफ़्टवेयर से हो या किसी और स्रोत से. (एसा मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं)…”
यह तो मेरा भी अनुभव है. भूखे भजन न होए गोपाला ! और यही कारण है कि भारत में जहाँ व्यक्तिगत फायनेंशनल फ्रीडम जैसी कल्पना नहीं हो पाती, ओपनसोर्स मृतप्रायः सा है.
चरखा,लिनक्स- बढि़या लेख है!