देसी Digg के बाद अब हिन्दी Digg भी

अक्षरग्राम पर ये मेरी पहली पोस्ट है। सर्वप्रथम सरपंच जी, नम्बरदार जी और दूसरे सभी पंचों का शुक्रिया कि उन्होंने फिर से इस चौपाल को आबाद किया और मेरी इसमें शामिल होने की जो इच्छा थी उसे पूरा किया।

Digg से तो सभी परिचित ही हैं। कुछ समय पहले मेरे पास एक मेल आई थी Jhanki.Com की तरफ से जिसमें एक Digg जैसी देसी साइट Jhanki के बारे में बताया गया था। मैं साइट पर गया कुछ खास लगी नहीं, ढंग के आर्टीकल की बजाय एडवर्टाइजमेंट टाइप आर्टीकल ज्यादा थे। हाल ही में एक और साइट निगाह में आई हिन्दीजगत जो कि बिल्कुल Digg का हिन्दी वर्जन है। आप साइट के सदस्य बनिए फिर किसी भी लेख, लिंक आदि को Digg कीजिए (पसंद है)। जिस लिंक को सबसे ज्यादा डिग किया जाएगा वो सबसे ऊपर आता जाएगा। लेखों (लिंक्स) को चैनलों (श्रेणियों) में बांटा गया है। साइट का लेआउट काफी सुन्दर और सुरुचिपूर्ण है जिससे मालूम होता है कि साइट का स्वामी तकनीकी रुप से दक्ष है। लेकिन वर्तनी की गलतियाँ बहुत हैं, जिससे सारा मजा खराब हो जाता है। इस साइट पर हिन्दी साइटों के साथ-साथ चिट्ठों से भी लेख हैं हाँ लेखों के केवल लिंक दिए हैं अतः ये आपतिजनक नहीं।

मैंने साइट पर उपलब्ध संपर्क-सूत्र का उपयोग करके इस पोस्ट की कड़ी भेज रहा हूँ। देखते हैं कब तक उत्तर मिलता है। अतः निम्न संदेश साइट के स्वामी के लिए (भी) है।

हिन्दी जगत में इस तरह की साइटों का बनना निसंदेह अच्छी बात है, यह हिन्दी के हित में है जिससे अंततः हिन्दी का प्रचार ही होगा। लेकिन इसका क्या कारण है कि ये साइटें अधिकतर गुणवता पर खरी नहीं उतरती। दूसरी बात बीते दिनों में जो साइटें बनीं किसी पर भी साइट के बारे, साइट की पॉलिसी के बारे में कोई उल्लेख नहीं ताजा साइट भी इसका उदाहरण है। इस का मतलब है कि या तो ये साइटें सिर्फ लाभ कमाने के लिए बनाई जा रही हैं अर्थात पकी-पकाई खाना चाहते हैं या फिर उन्हें हिन्दी जगत के बारे में पूरी जानकारी नहीं जैसा कैफेहिन्दी वाले मामले में हुआ था।

अब साइट एडमिनिस्ट्रेटर को मेरा सुझाव है कि ठीक है साइट आपकी है लेकिन अगर आप इस काम में हिन्दी चिट्ठाजगत को साथ लेकर चलें तो इससे आपकी साइट भी बेहतर होगी, परस्पर सहयोग एवं विश्वास भी कायम होगा तथा हिन्दी की भी सेवा एवं प्रचार होगा। हिन्दी चिट्ठाजगत में भाषाविदों से लेकर, तकनीकी विशेषज्ञों समेत हर तरह की सहायता मौजूद है। उदाहरण के लिए आपकी साइट पर हिन्दी वर्तनी तथा अनुवाद सुधारने हेतु आपको काफी मदद मिल सकती है। हिन्दी चिट्ठाजगत में हिन्दी संबंधी किसी भी परियोजना का हमेशा स्वागत है। हमारा आपके व्यावसायिक मामलों से कोई मतलब तथा हस्तक्षेप नहीं, हमारी इच्छा केवल यह है कि आप इस साइट को हिन्दी जगत की सामुदायिक साइट के रुप में विकसित करें जिस प्रकार Slashdot का देसी संस्करण शून्य है।

कृपया अपनी प्रतिक्रिया तथा टिप्पणी हिन्दी चिट्ठाजगत के इस आधिकारिक मंच पर दर्ज करें।

7 Responses to “देसी Digg के बाद अब हिन्दी Digg भी”

  1. Daal ka chuka bandar pachhta raha hoon :) Maine lagbhag 6 mah pehle http://kadighar.com/ book karaya aur Digg jaisi Hindi site banane per kaam aage na badh saka. Khair acchi baat hai aur bhi khiladi aayenge.

  2. श्रीश शर्माजी तथा अक्षरग्राम का हिन्दीजगत पर टिप्पणी के लिये शुक्रिया।
    हिन्दीजगत ये सामुदायिक साइट ही है। यहा की सब कहानीया सदस्यो ने सुझाई है। मै आगे जाकर ये कहना चाहाता हू की आप जैसे सदस्यो के सहयोग बिना ये साईट विकसित करना नामुनकीन है। अगर आप हिन्दी ब्लॉग लिखते है तो कृपया आपका चिट्ठा हिन्दीजगत पे दर्ज करे।
    वर्तनी गलतियाँ का हमे अफसोस है। ईसे सुधारना अब हमारी priority है|
    हिन्दीजगत को हमेशा हिन्दी की उमदा जानकारी वाले सदस्य की खोज है| जो अपना कुछ टाईम हिन्दीजगत के विकास मे दे सके| हमे लिखने के लिये ईस संपर्क-सूत्र का http://hindijagat.com/contact.php उपयोग करे|

  3. उदय जी, आपकी इस टिप्पणी को एक अच्छे प्रूफ रीडर की आवश्यकता है

    श्रीश शर्माजी तथा अक्षरग्राम का हिन्दीजगत पर टिप्पणी के लिये शुक्रिया।
    हिन्दीजगत ये सामुदायिक साइट ही है। यहा की सब कहानीया सदस्यो ने सुझाई हैमै आगे जाकर ये कहना चाहाता हू की आप जैसे सदस्यो के सहयोग बिना ये साईट विकसित करना नामुनकीन है। अगर आप हिन्दी ब्लॉग लिखते है तो कृपया आपका चिट्ठा हिन्दीजगत पे दर्ज करे
    वर्तनी गलतियाँ का हमे अफसोस है। ईसे सुधारना अब हमारी priority है|
    हिन्दीजगत को हमेशा हिन्दी की उमदा जानकारी वाले सदस्य की खोज है| जो अपना कुछ टाईम हिन्दीजगत के विकास मे दे सके| हमे लिखने के लिये ईस संपर्क-सूत्र का http://hindijagat.com/contact.php उपयोग करे|

  4. रमण जी यह तो कुछ नहीं उदय जी की साइट पर जाइए, मुन्नाभाई स्टाइल की हिन्दी लिखी है वहाँ, उसे देखकर मुझे वो पंगा ना ले नामक साइट की याद हो आई। अब वो तो खैर फन साइट थी जानबूझ कर वहाँ ऐसी हिन्दी लिखी गई थी, लेकिन इस साइट में ऐसी अशुद्ध हिन्दी अखरती है। इसीलिए मैंने उदय जी को मदद की पेशकश की थी।

  5. किस किस की मदद को दौड़ोगे?

    अभी शुरूआत, जल्दी ही हिन्दी संजालो की बाढ़ आने वाली है. यह गम्भीर चिंता व चिंतन क विषय है.

    श्रीशजी आपकी अक्षरग्राम पर लिखने की इच्छा पूरी हुई देख प्रसन्नता हो रही है. :)

  6. देवाशीष जी,
    मेरी भी हिन्दीडिग तकरीबन तैयार थी. डेमो देखिये http://www.cafehindi.com/hindidigg/. इसमें फ़ीड लिंक देकर अपने असली URL पर शिफ़्ट करना बाकी था.

    अन्य भी कई योजनायें थी पर फ़िलहाल सभी कुछ स्थगित कर दिया है

  7. मैथिली जी आप काम जारी रखें तथा जल्द ही इसको शुरु करें। क्या हुआ यदि एक साइट ऐसी आ चुकी है तो, एक से अधिक भी इस तरह की साइटें हो सकती हैं, इसके अतिरिक्त जो बेहतर होगी वही अधिक प्रचलित होगी।

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