छा गए शुकुल
Posted on मार्च 11th, 2007 द्वारा जीतेन्द्र
हमारे शुकुल और उनकी श्रीमतीजी का आनलाइन इन्टरव्यू सुनिए। इस इन्टरव्यू मे फुरसतिया जी ने काफी सारी अतरंग बाते की है और ढेर सारे खुलासे किए है। जरुर सुनिएगा।
(बोनस मे भाभी की आवाज मे एक गीत भी)
लेकिन कहाँ? खुशी की पॉडकास्टिंग पर, और कहाँ , लिंक ये रहा।
बाकी लोग चिंता ना करें, फोन पर टकटकी लगाकर बैठें, जाने कब घन्टी बज जाए। खुशी की आवाज बहुत बहुत मधुर है, रेडियो के लिए एकदम परफैक्ट। खूशी को इस इन्टरव्यू के लिए बहुत बहुत बधाई।
छा गए शुकुल।

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




hamari baat kerwado yaar - bahut khushi hogi unki aawaz sunker
छाये तो हमेशा ही हैं अब तो बरस पड़े!! मजा आ गया!!
सही है। अब तुम गला-वला साफ़ करके रखो। जल्दी ही तुम्हारा भी होने वाला होगा हिसाब! शुऐब किससे बात करना चाहते हो? बताओ जल्दी से करवाते हैं!
लिंक देने के लिए धन्यवाद.
जितुजी टेम्पलेट मे टेक्सट अलाइन लेफ्ट कर दीजिए, लगता है भूल गए हैं. फायरफोक्स में गडबड आता है.