सर्वज्ञ अब श्रीश जी के प्रबंधन में
Posted on मार्च 15th, 2007 द्वारा पंकज
दोस्तो आपने शायद ध्यान दिया हो कि सर्वज्ञ एक बार फिर सक्रिय हो चुका है। नारद के नए सर्वर पर आने के बाद से सर्वज्ञ पर काम लगभग रुक ही चुका था। हालांकि हिन्दी जालजगत में नए नए लोगों के आगमन से इसकी जरुरत और भी बढ़ जाती है। श्रीश जी ने सहर्षता से इसके प्रबंधन का बीड़ा उठाया है। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में सर्वज्ञ और अधिक समृद्ध होगा। श्रीश जी के इस योगदान के लिए उनका तहेदिल से शुक्रिया। एक बात और अपने देबू दा व जीतू तो हमेशा ही सर्वज्ञ पर सक्रिय रहे हैं व उनके बिना सर्वज्ञ के लेखों की संख्या काफी कम होती।
आप सभी से निवेदन है कि आप भी कम से कम एक अपनी मनपसंद का एक लेख तो सर्वज्ञ पर जरुर लिखें।

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




श्रीश भाई उर्जावान और जुझारू व्यक्तित्व के धनी है और तकनीकी पण्डित भी। हमे पूरा विश्वाश है कि उनके हाथों में सर्वज्ञ और ज्ञानवान तथा परिपूर्ण बनेगा।
पंकज जी आपका धन्यवाद ! सर्वज्ञ का विचार मुझे शुरु से ही बहुत अच्छा लगा। मेरी पूरी कोशिश होगी कि सर्वज्ञ अधिकतम अद्यतन और समृद्ध हो।
यह तो चोखा काम हुआ. श्रीश जैसी ही व्यक्ति की सर्वज्ञ को तलाश थी.
जुट जाओ भाई और मिसाल कायम करो. हमारी शुभकामनाएं.
उपर वाली कोमेंट मेरी है.
श्रीशजी के सानिध्य में सर्वज्ञ की सर्वज्ञता और बढ़ेगी।
श्रीश जी को शुभकामनाऐ
बहुत बढ़िया. श्रीश भाई को बहुत शुभकामनाऐं..अब मजा आयेगा.
शुभकामनायें।
श्रीश भाई को शुभकामनाऐं !
श्रीशजी को मुबारकबाद और उम्मीद है वो अपनी कला से एक नया अंदाज़ सर्वज्ञ पर निखारेंगे।
श्रीश बधाई हो प्रबंधन संभालने की, तुम वाकई में एकदम फिट उम्मीदवार हो, गुड लक
श्रीष,
अक्षरग्राम के मुख पृष्ठ पर परिचर्चा की कोई कड़ी नहीं है. कृपया शीघ्र एक बढ़िया, ध्यान खींचता कड़ी लगावें.
[…] *मार्च-2007 से […]