अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा - पाँच बातें
Posted on अगस्त 1st, 2007 द्वारा आलोक
आप सबसे अनुरोध है कि इस विषय पर लिखें - पाँच तारीख तक का समय है। यानी - आज, 1 अगस्त से लेकर पाँच अगस्त तक। हास्य रस का जम कर इस्तेमाल करें, आजकल चिट्ठों की दुनिया में वैसे ही गम्भीर विषयों पर लगातार चर्चा हो रही है।प्रविष्टि लिख कर यहाँ टिप्पणी में कड़ी दे दें या अपने लेख में इस लेख की कड़ी दे दें, स्वतः हमें पता चल जाएगा कि आपने कुछ लिखा है। अनुगूँज की तस्वीर लगाना न भूलें, यह आपको मिलेगी अनुगूँज पृष्ठ पर और अनुगूँज के अन्य नियम भी। छः तारीख को सभी प्रविष्टियों का सारांश प्रकाशित होगा, अतः जल्दी करें।
और घबराइए मत, बेधड़क लिखिए, आपको मालूम होना चाहिए कि हम आपसे भी बुरा लिखते हैं। फिर से याद दिला रहा हूँ - हास्य रस न भूलें!
Filed under: अनुगूँज

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




[…] अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा - पाँच बातें […]
लो भाई, हमरी पोस्ट सबसे पहली
इ रह लिंकवा
http://www.jitu.info/merapanna/?p=749
इससे पहले अनुगूंज के तेईस आयोजन हो चुके हैं। संख्या ठीक कर लें।:)
बाईसवीं और तेईसवीं की कड़ियाँ हैं क्या? अनुगूँज वाला पन्ना सिर्फ़ 21 दिखाता है।
हम ने भी कुछ साइड इफेक्ट सोचे हैं, 5 तारीख़ के पहले बतायेंगे. पक्का!!
आलोक भाई ये रहा लिंक : पिछली अनुगूँज का
http://www.akshargram.com/category/e0a485e0a4a8e0a581e0a497e0a582e0a481e0a49c/
समय बहुत कम रखा है, पाँच दिन तो सोचने में लग जायेंगे, पाँच दिन नये लोगो को अनुगूँज के बारे में बताने/समझाने में चले जायेंगे. फिर पाँच दिन लिखने में. पन्द्रह दिनो वाला पुराना मामला न सही दस दिन तो दो भाई….माहौल जमने में ही दस दिन लग जाते है
मेरी पोस्ट का लिंक ये रहा:
http://pagdandi1.blogspot.com/2007/08/22.html
[…] अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा - पाँच बातें Posted August 2, 2007 हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा - पाँच बातें । यह बीस-सुत्री कार्यक्रम जैसे स्टाईल में सजाकर पाँच बातें लिखना भी कसरत सा है, फिर भी चलो कोशिश करते है - बहुत दिनों बाद लिख रहा हूँ ना । […]
अच्छो तो ,. अबकी बार जीतू भैया ने सबसे पहले प्रविष्टि लिखकर बाजी मार ली । कोई बात नहीं …. देखते है अगली बार …..
हाँ तो हमने भी सपने यहाँ देखे हैं - http://prempiyushhindi.wordpress.com/2007/08/02/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a5%82%e0%a4%81%e0%a4%9c-22-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0/
[…] अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा 02Aug07 भई अब हम तो कभी अमेरिका गये नहीं और अमेरिका को जितना जाना समाचारों और टी वी के जरिये। हम तो इतना जानते हैं कि अपनी 10000/- रुप्पल्ली की तनख्वाह $10000/- हो जाती। वैसे जितना मैं इस बारे में सोचता हूं उतना ही रोमांचित होता जाता हूं। […]
[…] वैसे दो पोस्ट लिखने से दो चिट्ठाकार वापस आ जायें और एक कहे कि हम भी दिखा देंगे कि हम कम फ़ुरसतिये नहीं है। यह काम भर के लिये काफ़ी है।अनुगंज की शुरुआत भी एक उपलब्धि है। चाहे कोई माने या न माने लेकिन हम कह सकते हैं कि हमारे लेख को पढ़कर ही आलोक ने अनुगूंज का एलान किया। […]
यह लिजिये साहब हमारी सोच भी शामिल कर लें:
http://udantashtari.blogspot.com/2007/08/blog-post_03.html
आभार.
[…] जीतू भाई ने इस बार की अनुगूँज में हिस्सा लेते हुए पाँच बातें लिखी हैं कि यदि हिन्दुस्तान अमेरिका बन जाए तो कैसा होगा। कुछ बातें जो उजागर होती हैं: […]
[…] बहुत दिन बाद आलोक ने फिर अनुगूंज के घोषणा की। ब्लागरों को ‘कुंजी पटल काम’ मिला। […]
जे लो भईया हमऊ भी आ गये अपना ब्लॉगवा लेकर
ईहाँ पर चटका लगाओ—http://sunobhai.blogspot.com/2007/08/22.html
जे लो भईया हमऊ भी आ गये अपना ब्लॉगवा लेकर
ईहाँ पर चटका लगाओ—
http://sunobhai.blogspot.com/2007/08/22.html
कोशिश तो हमे भी की है….
http://paramjitbali-ps2b.blogspot.com/2007/08/blog-post_03.html
आदम की नजर में अनुगूंज 22 -
http://desitoons.wordpress.com/2007/08/04/when-india-becomes-america/
gambhir hoo bhaya aisan kahe bole
kapada to hamau chhodi daye american banve ke kaje
गुरूघंटालो लिख तो हमने भी दिया पर समस्या है अनुगुँज का लोगो क्या बलाहै कैसे लगाया जाताहै
गुरूघंटालो लिख तो हमने भी दिया पर समस्या है अनुगुँज का लोगो क्या बलाहै कैसे लगाया जाताहै लोगो लगाने के लिये html का प्रयोग कैसे करना है टेक्नोराती टैग के साथ क्या करना होगा मुझे पता नही है कोई बता दो रे
[…] वैसे लिखना तो आलोक को पहले चाहिए था कि अमरीका उन्हें कैसा लगा। वैसा ही जैसा वे सोचते था या अलग। पर उन्होंने अपनी सोच की छिपकली सभी पर छोड़ दी अभी भाई लोग अनुगूंज में सोच सोच कर लिख रहे हैं। अब बड़े भाई ने कहा है तो लिखना तो पड़ेगा ही। तो लीजिए हमारी भी श्वेत-श्याम आहुति इस 22वीं अनुगूंज में। […]
मेरी अनुगूंज 22 की प्रविष्टि निम्न है:
http://hgdp.blogspot.com/2007/08/2097-22.html
विषय था “हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा - पाँच बातें”. इसमें समय स्पष्ट नहीं किया गया था कि कब हिन्दुस्तान अमरीका बनेगा. मेरी परिकल्पना में यह 2097 में होगा! शेष आलोक देखें.
हमारी ऊपर वर्णित पोस्ट की टिप्पणी में ही आलोक पुराणिक ने अपनी अनुगूंज की प्रविष्टि ठेल दी है. उसे कृपया वहीं से ले लिया जाये!
टिप्पणी में अनुगूंज प्रविष्टि ठेलने का शायद यह पहला अनूठा प्रयास होगा.
मेरे विचार से १ अगस्त को घोषणा और ५ अगस्त को अन्तिम दिन। यह बहुत कम समय है। आगे से कम से कम एक सप्ताह अन्त पूरा दिया जान चाहिये। जब तक आप सोचते हैं कुछ लिखते हैं समय समाप्त। अक्सर आप पहले से कुछ लिखने की सोचते हैं यदि एक पूरा या दो पूरे सप्ताह अन्त मिले तो अच्छा हो।
अलोक जी माफी चाहूमगा कि कुछ लिख नहीं पाऊंगा।
[…] नौ-दो-ग्यारह रहने वाले यदि सुबह के भूले की तरह शाम को घर आकर “अनुगूंज बाइस” करें तो क्या हो ? किसी नये ब्लॉगर ने चुपके से मेरे कान में सवाल पूछा. अब हम भी कोई पुराने ब्लॉगर तो थे नहीं कि अपनी फुरसत का उपयोग, कुछ नया ना लिख पाने की हताशा में, अपने पुराने संस्मरणों को लिखने के लिये करने लगते और ना ही इतने नये कि आज से 90 साल बाद के हिन्दुस्तान की झलक ही दिखला देते. तो पहले तो हम चुप ही रहे लेकिन जब एक नयी नयी ब्लॉगरनि (महिला ब्लॉगर) ने यही सवाल किया तो हमें भी अपना ब्लॉगज्ञान बधारने कि खुजली सी महसूस हुई. हमने उन दोनों को समझाया और कहा देखिये जब वन डे के खिलाड़ी को टैस्ट में खिलाया जाय तो उसे थोड़ी याद रहेगा कि वो किस इनिंग्स में खेल रहा है ..वो तो केवल ओवरों के आंकड़े रखता है या रन रेट के वो भी पूरे डीटेल में…. उसी तरह जब टेलीग्राम लिखने वाला चिट्ठी लिखने लगे तो वो भी ई-मेल के जमाने में तो ऎसी गलतियां होना लाजमी हैं ना.. […]
आलोक जी, उनमुक्तजी की बात पर गौर किया जाये। सर्वज्ञ पर नियम जो हैं सो हैं लेकिन आम तौर पर अनुगूंज में लिखने के एक पखवाड़ा दिया जाता रहा है। आप पुरानी अनुगूंज देख लें। तारीख कुछ और बढ़ाये ताकि और लोग इसमें भाग ले सकें।
[…] अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा - पाँच बातेंअवलोकन अनुगूँज 23: आस्कॅर, हिन्दी और बॉलीवुडअनुगूँज 23: आस्कॅर, हिन्दी और बॉलीवुडअनुगूँज 22 :हिन्दी के शब्द-संग्रह का आग्रहअवलोकन: अनुगूँज 20 - नेतागिरी, राजनीति और नेता […]
मेरा लेख
इस पर एक कविता लिखी है। लिंक है http://dardhindustani.blogspot.com/2007/08/blog-post_9222.html
[…] ये अनुगूंज भी बड़ा बवाल है। तेईस ठो हो चुकीं लेकिन अब फिर से बाइसवीं करायेंगे आलोक। विषय भी क्या सनसनाता हुआ- हिंदुस्तान अमरीका बन जाये तो कैसा होगा। अरे कैसा होगा- वैसा ही होगा जैसा मंजूरे खुदा होगा। […]
समय बढ़ गया तो क्या - मैंने तो रात भर जग कर अनुगूँज 22 का लेख पूरा किया है। पढ़ना तो पड़ेगा
मेरा अमरीका मय भारत
कुछ लिखने का प्रथम प्रयास है…बाक़ी तो आलोक बताएँगे
पहले गलती से प्रविष्टि कि कड़ी नहीं दे पाया…उसके लिए क्षमा
प्रविष्टि कि कड़ी यह रही….
http://pulkitj.blogspot.com
tragaperra
coercing Nakayama,thickets,fattest!befell,alphanumeric:
भईयाजी हमहू चटकाई दिये हैं तनि निहार लियो
http://aarambha.blogspot.com/2007/08/blog-post_10.html
संजीव तिवारी
अनुगूँज के लोगो का html देने में नाक़ामयाब होने से अपना आलेख sumit नहीं कर पा रहा हूँ..देश की आज़ादी की सालगिरह के पूर्व बता दें तो बड़ी कृपा.
[…] आलोक जी द्वारा पिछले दिनों आयोजित अनुगूंज में हमारे कई चिट्ठाकार साथियों ने इस विषय पर अपने-अपने अंदाज में विचार रखे कि यदि हिन्दुस्तान अमेरिका बन जाए तो कैसा होगा। अपन ने ज्यादातर साथियों के पोस्ट पढ़े। एक दिन अनूप दा ने कानपुर से फोन करके हमें प्रेरित भी किया था कि अब तो इस विषय पर लिखने का डेडलाइन पंद्रह अगस्त तक बढ़ गया है, तुम भी कुछ लिख डालो। हमने हामी भी भर दी कि ठीक है, लिखेंगे। पर पंद्रह अगस्त बीत गया, हम समय रहते लिख नहीं पाए। ऐसा नहीं कि वक्त न मिला हो, चाहता तो लिखने के लिए समय किसी तरह जुगाड़ ही लेता। लेकिन जैसा कि अपन की बुरी आदत है, लिखने से पहले सोचते बहुत हैं, और सोचने के लिए अक्सर उस विषय पर संदर्भ के लिए थोड़ा-बहुत शोध भी कर डालते हैं। इस चक्कर में लिखना गोल हो जाता है। […]
ई कौन बात बेबात ,दुत्तेरे की !
अमेरिका बन जाये तो कइसा होगा ,इ भी कोई बात है. अरे घर से बाहर नही निकलते है का ?
पारक मे सान्झ झुट्पुटा मे जाइये, सर्मिला जी का सेन्सर फ़ेल. जवान जवान लइका-लइकी लोग इश्क पर
जोर नही गालिब को बुझाने की फ़िराक मे दिख जायेन्गे .
और लिजियेगा….तो कोनो जान पहचान के नया मुल्ला-प्याज वाला अफ़्सर के घर मे महीन नजर डालिये तो बुड्ढा-बुडिया
मतलब नामधारी माये-बाप चेशायर होम का सुख लाभ उठाते दिखाई देन्गे.
और कही मेमसाहेब भेटा गई तो चाय पीके जाने निर्देश जारी करते हुए आया को गोहरायेन्गी, “अरे बाबा को दे जाओ, अन्कल
आये है”, सनी अन्कल को ‘बा बा ब्लैक शीप सुनाओ’, सुना दिया तो लक्का कबुतर मतिन गरदन उचका कर कहेन्गी, सेरउड स्कूल
मे भेज रहे है, इस साल, वही जहा राजीव अमिताभ पढे थे,
मन भारी मत कीजिये, लौटानी मे छोटी छोटी बच्चियो की ,चिक्क्स, चाकलेट्स्स, कोल्ड ड्रिन्कस्स की जीभ चट्काती चह्चहाट आपका मन
हल्का न कर दे तो अकब..नही,नही..अमर मेरा नाम नही.
मन चन्गा तो …अथुआ मे गन्गा नही सुने है, मनन करिये, अमेरिका हिन्दुस्तान सब यही है.
अखबरवा नही देखते का, २०१० तक अमेरिका यही लाने का प्लान बना रहे है हमरे नेता लोग. अउर आप अमेरिका खोजने निकले है
कबीर का इतना इन्सल्ट मत करिये भाई, अमेरिका खोजन मै चला …अमेरि..अरे लईटइया चला गया, बतवा तो पूरे नही हूआ.
खैर छोडिये , अभी तो दू हजार साते है ना,
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dilated abstention uncontrollably cowls salters