अनुगूँज २२ - पन्द्रह अगस्त तक जारी
Posted on अगस्त 5th, 2007 द्वारा आलोक
चूँकि अभी तक हिन्दुस्तान अमरीका नहीं बना है, अनुगूँज २२ की तिथि पन्द्रह अगस्त तक बढ़ा दी गई है। तो, लिखें। कई बन्धुओं-भगिनयों को अनुगूँज की छवि का कूट नहीं मिला, सो यहाँ है - वही जो a href से शुरू हो रहा है, ऊपर वाला। यह अपने लेख के शुरू में लगा दें। और नीचे वाला, जो a href से शुरू हो रहा है, उसे अपने लेख के अन्त में लगा दें।
यह अनुगूँज बाईसवाँ है या चौबीसवाँ, अभी भी रहस्य है क्योंकि विगत अनुगूँज आयोजनों की सूची में २१ का ही उल्लेख है। खोजबीन जारी है। अब तक दस से अधिक लेख छप चुके हैं, सबको धन्यवाद। याद रहे कि अनुगूँज घोषित कोई भी कर सकता है, अगले पखवारे के लिए विषय व घोषणा अभी से की जा सकती है। तो विषय सोचिए, और इस बार के अनुगूँज के लिए लिखते समय हास्य रस कतई न भूलें
सारांश १६ अगस्त को छपेगा।

अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 




यह ठीक किया.
अरे ये क्या जी ..पहली बार तो लिखते लिखते सो गये थे..क्या फिर से लिखें… क्या एक व्यक्ति दो बार अनुगुंज कर सकता है…. ??
अरे वाह, पहले पता होता तो सुस्ता-सुस्ता के लिखता ।
और भईया ये डेट एक्सटेंसन की फैसिलिटी, बिना लेट फाईन के, हिन्दुस्तान में ही मिलती है !
खैर आपलोग लिखते रहिए - जो मन में आये । बहुत दिन के बाद आपलोगों के बीच आया हूँ ना कुछ नये चिट्ठाकारों से मिलने का मन कर रहा है ।
वैसे जब मैंने प्रविष्टि डाल दी है तो अब निश्चिंत होकर आगे लिखने वालों का लेख पढ़ता रहूँगा ।
क्या एक व्यक्ति दो बार अनुगुंज कर सकता है
हाँ, कर सकता है। वैसे यह दूसरा अनुगूँज नहीं है, (तथाकथित) बाईसवें की तारीख बढ़ाने की ही घोषणा है।
जी मेरा प्रश्न आपके लिये नहीं अपने लिये था… एक बार लिख चुका हूँ …इस तथाकथित अनुगूज में…क्या एक बार और लिख सकता हूँ … क्या पता बन ही जाय हिन्दुस्तान अमरीका
धन्यवाद जी अब अपुन भी अनुगुँज का लोगो लगा लिये है पर भइन को अभी ये समझ में नही आया कि पिंग क्या बला है और कैसी होती है
मैने भी अनुगुंज का लोगो लगा लिया है। आशा है कि अब कविता को स्थान मिल पायेगा।
http://dardhindustani.blogspot.com/2007/08/blog-post_9222.html
ये रही मेरी प्रविष्टि,
http://ninaaad.blogspot.com/2007/08/blog-post_13.html
आज 17 अगस्त है अभी तक सारांश नहीं छ्पा.
17 अगस्त हो गई है जनाब इन्तजार है हमको बेकरारी से सारांश का
19 ho gayee jee ab to.
इंतजार तो मैं भी कर रहा हूँ पर बैठे-बैठे एक विचार आया है सुधिजन इस पर थोड़ा ध्यान देंगे ।
मुझे ऐसा लगता है कि, एक प्रविष्टि लिखने से काफी ज्यादा समय और सोच की जरूरत सारांश लिखने में पड़ती है ।
इसलिए प्रविष्टि लिखने की अंतिम तिथि और सारांश प्रस्तुत करने की तिथि के बीच एक दिन का अंतर न रख पाँच दिन का अंतर रखा जाना चाहिए - इससे आयोजनकर्ता को पेशेगत जिम्मेवारियों का मध्य समय निकालकर सारांश तैयार करने का समय मिल सकता है ।
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