देर है अंधेर नहीं
Posted on सितम्बर 17th, 2007 द्वारा देबाशीष
सितंबर 2005 में शशि सिंह ने “कारे कजरारे” नाम की विज्ञान फंतासी कथा “बुनो कहानी” पर शुरु की थी, एक वैज्ञानिक पिता की सांवली बेटी की दास्तां। कहानी पसंद तो की गई पर इसके बाद इसे पूरा करने का बीड़ा किसी ने नहीं उठाया। अब दो साल देर से ही सही इस कहानी को अंततः पूर्ण कर लिया गया है और इस कथा का दूसरा भाग लिखा है मीनाक्षी ने। दुबई निवासी मीनाक्षी का अपना चिट्ठा भी है। कहानी पढ़ कर लेखिका की हौसला अफज़ाई तो करें ही, तरुण और जीतू की लिखी अधूरी कहानियों को पूरा करने के दो साल इंतज़ार तो न करवायें, आप भी इन कहानियों को बुनने में हिस्सेदारी कर सकते हैं। अपने अपने ब्लॉग में तो हम सभी चिट्ठाकार लिखते ही हैं, कभी सामुदायिक चिट्ठों पर भागीदारी का भी आनंद उठायें।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 



