चिट्ठाजगत-संकलक के आँकड़े - कौन सी सेवा पसन्द करते हैं हिन्दी के चिट्ठाकार?
मूल प्रविष्टि यहाँ थी, पर शुक्रवारी खामियाजा भुगतते हुए वह सोमवार तक दब गई, इसलिए यहाँ फिर से छाप रहा हूँ।
यूँ ही खाली बैठे थे - चिट्ठाजगत-संकलक कुछ दिन पहले बैंकॉक घूम के आया था, तब तक चिन्ता थी, अब आराम फ़रमाते हुए सोचा कि देखते हैं कुछ आँकड़े।
आइए, देखते हैं कि हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में किस किस स्लेट पर कितने लोग लिखते हैं।
आप पाएँगे कि अधिकतम चिट्ठे ब्लॉग्स्पॉट पर ही आतिथ्यित हैं। वैसे यह बात तो हममें से अधिकतर को पता ही थी, लेकिन आँकड़े सामने रखना अच्छा रहता है। दिलचस्प बात यह है कि सौ से कुछ अधिक लोग ही अपने डोमेन पर चिट्ठेबाज़ी करते हैं।
एक और दिलचस्प बात यह है कि निजी डोमेन, ब्लॉग्स्पॉट, वर्ड्प्रेस वाले हिन्दी के चिट्ठे हटा दें, तो कुल जमा सौ चिट्ठे नहीं बचेंगे।
है न दिलचस्प?
क्या भारत आधारित नई सेवाओं के आने से हिन्दी के चिट्ठा लेखन में कोई फ़र्क आया है?
देखते हैं उन सेवाओं को जो पिछले साल के बाद ही शुरू हुई हैं - पिछले साल, २००७ की जून के बाद से १२०० नए चिट्ठे आए हैं, और भारत आधारित नई सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले चिट्ठे केवल साठ के आसपास ही हैं। यानी नए चिट्ठों में से कुल पाँच फ़ीसदी ने भारत आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।
कारण क्या हैं, यह आप ही सोचें और बताएँ। आखिर चुनाव भी आप ही ने किया है न।
यह आँकड़े प्रायः सभी हिन्दी के चिट्ठों का प्रतिनिधित्व करते हैं, शायद ९९% का।
लाते रहेंगे इसी तरह के दिलचस्प आँकड़े आपके पास।
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 



