Posted on मार्च 11th, 2007 द्वारा जीतेन्द्र
हमारे शुकुल और उनकी श्रीमतीजी का आनलाइन इन्टरव्यू सुनिए। इस इन्टरव्यू मे फुरसतिया जी ने काफी सारी अतरंग बाते की है और ढेर सारे खुलासे किए है। जरुर सुनिएगा।
(बोनस मे भाभी की आवाज मे एक गीत भी)
लेकिन कहाँ? खुशी की पॉडकास्टिंग पर, और कहाँ , लिंक ये रहा।
बाकी लोग चिंता ना करें, फोन पर टकटकी […]
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Posted on अक्तूबर 4th, 2005 द्वारा पंकज
जब लिखना शुरु किया तो जो शीर्षक दिमाग में आया वह था - जीतू जी जोर पर हैं पर फिर पता नहीं क्यों बदल कर नारद जी व्यस्त हैं। वैसे जीतू जी जोर अनुप्रास का अच्छा प्रयोग है। शुक्ल जी इस बात पर खूब नंबर देते।
खैर अब आते हैं मुद्दे की बात पर। जीतू जी […]
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Posted on सितम्बर 8th, 2005 द्वारा आलोक
वैसे मैं इतना लिखता नहीं हूँ, पर जिनकी रैगिग लेते हैं उनके लिए बदले मे कुछ तो करना ही पड़ता है इसलिए झेलो।
अधिकारिक तौर पर चिट्ठों का सैकड़ा पार हो चुका है। वैसे आजकल जिधर देखो उधर हिन्दी के चिट्ठे फिंके मिलते हैं, लेकिन कमाल की बात अग़र कोई है तो वह है एक […]
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Posted on जून 11th, 2005 द्वारा पंकज
अभी अभी नारद जी के हवाले से विनय जी वेब पर हिन्दी वाले खबर दिए हैं कि हिन्दी समाचार पत्र नवभारत टाईम्स का सजाल यूनिकोड में उपलब्ध हो गया है। जाकर देखा सजाल तो बढ़िया बनाया है। अंग्रेजी संस्करण से ज्यादा अच्छा लग रहा है शायद इसलिए कि गूगल एडस हिन्दी में नहीं डाल सकते। […]
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Posted on अप्रैल 14th, 2005 द्वारा विजय ठाकुर
आज सही ब्रेक मिला, तो इंटरनेट की गलियों में भटकता फिर रहा हूँ। बस थोड़ी देर और, फ़िर कुछ उत्पादक किया जाएगा। प्रभात-ख़बर के ही माध्यम से ही एक और वेबसाइट देखा जो आपको बतायेगा कि आप किस वक़्त मौत की नींद सोएँगे और आपकी मौत में कितने सेकेंड्स बचे हैं। बहुत बढिया बिजनेस […]
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