Posted on फरवरी 25th, 2005 द्वारा पंकज
शैल जी बड़े दिनों के बाद आए “ चिठ्ठाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी” पर चल रहे संवाद पर एक बढ़िया सी प्रविष्टि कर दिए। जाते जाते एक बहुत ही सुन्दर कविता, वो भी उसकी मौत के बावजूत बता गए। कविता से प्यार मुझे भी बहुत है। फौरन शैल द्वारा बताई दुष्यंत कुमार की शकुन्तला अर […]
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Posted on फरवरी 24th, 2005 द्वारा पंकज
अनूप सेठी जी का वागर्थ में “हिन्दी का नया चैप्टर : ब्लॉग” यहाँ से जरुर पढ़े
यह ब्लॉग है क्या बला? एक तरह की वेबसाईट ही है। थोड़ी अनौपचारिक। थोड़ी अव्यवसायिक। थोड़ी निजी। थोड़ी सार्वजनिक। इसे बनाने और सर्वर पर रखने की झंझट नहीं है। फिलहाल तो जगह मुफ्त में मिल रही है। इसे एक […]
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Posted on जनवरी 23rd, 2005 द्वारा पंकज
ज्ञानीजन समझ ही गए होंगे कि मैं क्या कह रहा हूँ इस लिए आज के लिए मेरी राम राम।
अपडेट (अरे यार कोई हिन्दी शब्द सुझाओ इस के लिए) - कहानी तो बुन चुकी है इसीलिए कालिदास से कह गए हैं - पहले सजाल पर देखो फिर ब्लॉगो। अभी जाके पढ़ता हूँ।
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Posted on जनवरी 23rd, 2005 द्वारा पंकज
प्रतिभास - http://pratibhaas.blogspot.com
हिन्दी पर अनुनाद सिंह जी की पकड़ देखकर मजा आ गया। आज ही संचायी शब्द का पता चला। मैं हिन्दी ब्लॉग पढ़ते पढ़ते पक्का समझदार हो जाउँगा। अनुनाद जी इन्दौर से हैं जो कि हिन्दी चिट्ठों का पहला गढ़ था अब तो कानपुर वाले भी आके भसड मचा चुके हैं।
ई-लेखा - […]
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Posted on जनवरी 23rd, 2005 द्वारा पंकज
एक व्लाद भाई देस में घूम रहे हैं। हमेंशा नया नजरिया मजेदार होता है। आप भी पढ़िए।
ये तार सरीखी प्रविष्टि हमने एक जाल से सीखी है बताओ उसका नाम।
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