Posted on सितम्बर 30th, 2004 द्वारा पंकज
मेरा कुछ नहीं हो सकता अभी 15 मिनट पहले रोटी खाने से पहले अपने प्रविष्टि शीर्षकों के चयन पर रो के हटा हूँ और देखो फिर से जादु गा रहा हूँ। इस बार खबर ये है कि फॉयरफॉक्स छा गया है। हिन्दी IME प्रयोग करने वाले जानते होंगे कि कई बार Alt + […]
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Posted on सितम्बर 30th, 2004 द्वारा पंकज
चिट्ठाकारों के गूगल ग्रुप पर आई ईमेल से जितेन्द्र चौधरी के “मेरा पन्ना” चिट्ठे के बारे में पता चला। लीजिए भैया जी अब कुवैत भी हिन्दी ब्लॉगजगत के नक्शे पर आ गया। आलोक जी तो मनीला में हैं हीं चाहे थोड़े समय के लिए ही। जितेन्द्र की कलम से उनके बारे में उनकी ब्लॉगर प्रोफाइल […]
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Posted on सितम्बर 28th, 2004 द्वारा अनूप
अमेरिका में डुगडुगी पिट चुकी है चुनाव की.चुनाव में जो भी हो चुनाव के बाद की कथा मैं सुनाता हूं.अक्षरग्राम की चौपाल पर फैले आतंकवादी सन्नाटे के समूल नाश और श्रम को भुलाने के लिये सुनें:-
एक बार देखादेखी जंगल के जानवरों को भी चुनाव का चस्का लग गया.वहां भी जनता कीकी बेहद मांग पर चुनाव […]
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Posted on सितम्बर 22nd, 2004 द्वारा पंकज
काफी मेहनत और विभिन्न प्रयासों के बात आखिर अक्षरग्राम को वर्डप्रैस में लाने में सफल हो ही गया। आप सभी को पासवर्ड वगैरह भेज दिए हैं यदि कुछ कठिनाई आए तो लिखिएगा। यदि कोई भद्रजन इस परिवर्तन से आए बदलाव की अच्छाईयों बुराईयों की समीक्षा कर सके तो बहुत बढिया होगा। क्यूँकि हम तो कुछ […]
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Posted on सितम्बर 22nd, 2004 द्वारा इंद्र
हम भी चौपाल में हाजिरी देने आ गये पंकज के निमंत्रण के साथ। चौपाल के सब दोपायों को राम-राम् ,सलाम या यथायोग्य।
कोशिश यह रहेगी कि राख न ठंडी हो
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