सूचना…

अभी मिले एक सुझाव के आधार पर मैंने ये निर्णय लिया है कि ई-मेल वाला नियम हटा लिया जाय। तो मित्रों, अब आप सीधे १ नवंबर को अपना चिठ्ठा अपने ही ब्लॉग पर प्रकाशित करें, इसलिये अब मुझे (नीरव को) प्रेषित करने की आवश्यकता नहीं…
असुविधा के लिये खेद है।

अक्षरग्राम अनुगूँजः पहला आयोजन

देबाशीष ने ‘अनुगूँज’ का शंखनाद तो कर ही दिया है। साथ ही मुझे सर्वप्रथम मेज़बानी करने का न्योता दिया, इसके लिये मैं आभार व्यक्त करता हूँ। विषय घोषणा में इस देरी के लिये दो पंक्तियों में स्पष्टिकरण देना चाहुँगाः
प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है,नये परिंदों को उड़ने में वक्त तो लगता […]

अक्षरग्राम अनुगूँज

संचार के विविध माध्यमों से हमें हर रोज़ ढेरों सूचना प्रप्त होती है। इस सूचना और हमारे आसपास की घटनाओं से हमारी राय बनती है। ज़ाहिर है मुक्तलिफ़ राय; हर राय के पीछे अपने वज़हात। राय जो आपकी मौज़ुदा मनःस्थिति, स्थान और आपके अपने खास व्यक्तित्व और सोच के प्रभाव से बनाती है आपकी […]

महाभारत कथा

चाहे देशी हो या परदेसी,निवासी हो अनिवासी,घर में हों या बाहर,नौकरी कर रहें हों या मिल्कियत हम सभी किसी न किसी के अधीन रहते हैं.पुराने जमाने में यह अधीनता राजा की थी.आज यह ‘बास’की है.’बास’ कोई भी हो सकता है.मालिक,सीनियर,पति,पत्नी या वह.
तो राजा से व्यवहार करने का नियम बताये गये है महाभारत में.अक्षरग्राम […]

सत्येश भंड़ारी की कविताएँ

भाई कविता और छपास की पीड़ा साथ साथ चलती हैं। पहले लोग बाग अपनी कविताओं से दोस्तों को पकाया करते थे अब इंटरनेट से दुनिया के कोने कोने में पहुँच रहे हैं तो लीजिए जनाब आज आप के लिए खास गूगल से खोजी गई सत्येश भंड़ारी का कविता संग्रह प्रस्तुत करते हैं। जरा नीचे […]