Posted on नवम्बर 28th, 2004 द्वारा पंकज
सज्जनों एवं देवियों
ओह अभी देवी तो कोई है ही नहीं सभी देव हैं चलिए कोई बात नहीं पते की बात पर आते हैं। पहले भी इस बात पर चर्चा हो चुकी है विषय है
1. नीरव अतुल द्वारा प्रस्तावित ब्लॉगजीन
2. अपना डोमेन नेम
तो वेब पर उपस्थिति के लिए दो चीज़ो की आवश्यकता होती है। […]
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Posted on नवम्बर 26th, 2004 द्वारा पंकज
कॉलेज के बाद और शादी से पहले का दौर नौजवानों के लिए बड़ा मस्त होता है। कईयों ने इस गुण गाए हैं। जगजीत सिंह का एक पंजाबी गाना भी है – छड़याँ दी जून बुरी यानि कि कुँवारों की जात ही बुरी होती है। इसकी कुछ पंक्तियाँ है –
जे किसी छड़े दी माँ मर जावे
कल्ला […]
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Posted on नवम्बर 25th, 2004 द्वारा पंकज
हिन्दी ब्लॉगमंडल में एक बड़ी पुरानी पेट दर्द रही है - प्रविष्टियों के साथ चित्रों को सम्मिलित करना। मानना होगा की इस बारें में सब से ज्यादा खोज अतुल जी ने की होगी। रीडिफ के दामन से ऐश्वर्या को गाँव में खींच के लाए। माईजावासरवर से भी थोड़ा खिलवार किया। पर अब जब कि उन्होंने […]
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Posted on नवम्बर 25th, 2004 द्वारा पंकज
जितेन्द्र का दुखड़ा पढ़ कर आज हाईवे वन औ वन के शाम के युद्धसरीखे ट्रैफिक में प्रण कर लिया था कि अब चाहे जो हो जाए - प्रविष्टि हो कर रहेगी। घर आकर चाय पी और नोटबुक को हाथ ही लगाया था कि बीवी ने कहा कि - अगर कम्पयूटर पर कुछ करना है […]
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Posted on नवम्बर 18th, 2004 द्वारा पंकज
यदि आप ने दूसरी अनुगूँज के लिए अपनी प्रविष्टि नहीं लिखी है और आप “भारतीय संस्कृति क्या है….” के ऊपर अपने विचार रखने चाहते हैं तो अभी भी समय बाकी है। 22 तारीख से पहले अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं
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