जय राम जी की

पंकज जी का शुक्रिया गाँव के चौपाल पर हुक्का गुड़गुड़ाने का मौका देने का। अब हुक्का तो अपना ही रहेगा पर तमाखू माँगता रहूँगा भाइयों, क्यों क्या खयाल है। अरे हाँ वो क्या कहते हैं मिर्ची सेठ और आलोक भाई ने पूछा था प्रारंभ के छात्रों की हिन्दी में मीन मेख के बारे में, […]

अपने चिट्ठो को प्रसिद्ध कैसे करें?

प्रसिद्धि कौन नहीं चाहता? यदि आपने डेविल्स एडोवोकेट देखी हो तो आप को आखिर का दृश्य जरुर याद होगा जहाँ अल पचीनो कहता है - Vanity is my favorite sin। यहाँ से सुन भी सकते हैं। तो अपने चिट्ठे को प्रसिद्ध कैसे किया जाए के ऊपर वेय्न हरबर्ट जी ने चार प्रविष्टियाँ लिखी हैं। […]

संजाल और सजाल

आज कल आपने देखा होगा कि संजाल और सजाल शब्दों का प्रयोग इक्का दुक्का होते दिख जाता है। मैं इन का प्रयोग कुछ ऐसे करता हूँ। संजाल को Internet की जगह व सजाल को website की जगह। तो website address का बन जाएगा सजालपथ। Internet Surfing का संजाल पर घूमते या मटरगश्ती बन जाएगा। भाई […]

महारथियों, संभावनाएं हैं

गाँव वालों,
तो वही हुआ, जो मैने सोचा था, वो कोई और भी सोच चुका था, प्रकृति कभी भी सृजन के मामले मे जोखिम नही लेती - एक से ज्यादा मस्तिष्क एक ही प्रवाह में बहते हैं! नया क्या है?
mp3 feeds can be automated.
तो एक कडी ये लो - प्लग इनं और […]

महारथियों, क्या ये संभव है?

कल्पना कीजिये कि आप जो भी अपने ब्लाग पे पेलते हैं वो आपने एक .mp3 मे भी रेकार्ड किया.
अब ऐसी सभी recorded .mp3 की स्ट्रीमिन्ग ठीक उसी तरह आन-लाईन रेडियो के रूप मे कर दो, जैसे हम नये ताज़े RSS Feed दिखा देते हैं चिट्ठा विश्व के माध्यम से. इस के लिये पहले […]