Posted on फरवरी 28th, 2005 द्वारा अनूप
बहुप्रतीक्षित निरंतर को प्रकाशित देखकर मन खुश हो गया .वाह, खूबसूरत , सुभानअल्लाह जैसे शब्द अपर्याप्त लग रहे हैं.सरसरी नजर से लगभग पूरी पत्रिका पढ गया मैं.पहला अंक इतना मुकम्मल है,आगे तो और सुधार होंगे.पत्रिका और बेहतर,लोकप्रिय होगी—मेरा यह विश्वास है.
हिन्दी चिट्ठाकारों के आपसी समझ,सहयोग,बंधुत्व भाव की कहानी कहती है यह चिट्ठाजगत की पहली […]
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Posted on फरवरी 25th, 2005 द्वारा पंकज
शैल जी बड़े दिनों के बाद आए “ चिठ्ठाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी” पर चल रहे संवाद पर एक बढ़िया सी प्रविष्टि कर दिए। जाते जाते एक बहुत ही सुन्दर कविता, वो भी उसकी मौत के बावजूत बता गए। कविता से प्यार मुझे भी बहुत है। फौरन शैल द्वारा बताई दुष्यंत कुमार की शकुन्तला अर […]
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Posted on फरवरी 24th, 2005 द्वारा पंकज
अनूप सेठी जी का वागर्थ में “हिन्दी का नया चैप्टर : ब्लॉग” यहाँ से जरुर पढ़े
यह ब्लॉग है क्या बला? एक तरह की वेबसाईट ही है। थोड़ी अनौपचारिक। थोड़ी अव्यवसायिक। थोड़ी निजी। थोड़ी सार्वजनिक। इसे बनाने और सर्वर पर रखने की झंझट नहीं है। फिलहाल तो जगह मुफ्त में मिल रही है। इसे एक […]
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Posted on फरवरी 23rd, 2005 द्वारा पंकज
आप सभी यह तो जानते ही हैं कि अपने अक्षरग्राम के रंगरोगन का सामान माईकल हीयलमैन के कुबरिक अभिकल्प पर आधारित है। बाकी तो सही है पर अपने आप से इसके साथ जो चिट्ठे के माथे के लिए छवि आती है वह सामान्य सी नीली सी होती है। ज्यादा दूर न जाईए अपने ईस्वामी भाई […]
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Posted on फरवरी 22nd, 2005 द्वारा अनूप
बधाई अतुल को, उनके परिवार को .नयीअभिव्यक्ति (16.02.05) मे अतुल के संस्मरण की तीसरी किस्त तथा उनके पिताजी (श्री श्रीनाथजी) की कहानी उपहार छपी है.पिता-पुत्र का लिखा अगल-बगल छपा देखने का संयोग विरल होता है.धन्य हुई आंखें, तृप्त हुआ मन . बधाई.
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