Posted on मार्च 28th, 2005 द्वारा आशीष
भाइयों, होली पर छुट्टी की वजह से आठवीं अनुगूंज के समापन की तिथि बढ़ाकर ३१ मार्च कर दी गयी है। १ अप्रैल से नवीं अनुगूंज के आयोजकेकाम संभाल सकते हैं। मैं अपना अवलोकन अप्रैल के प्रथम सप्ताह में भेज दूंगा।
होली की ढेरों शुभकामनायें।
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Posted on मार्च 27th, 2005 द्वारा पंकज
अरे चौंकिए मत। मैं यहाँ कोई मौसम की कथा नहीं सुनाने जा रहा। चाहूँ भी तो भी मौसम मेरे दिमाग के दायरे से बाहिर है और आलस के मारे रिसर्च नहीं करूँगा। तो फिर यह कौन सा बसंत है? जनाब बसंत नाम है मेरे व्यक्तिगत ब्लॉग हाँ भाई के नए अभिकल्प का (रमण जी […]
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Posted on मार्च 27th, 2005 द्वारा पंकज
अक्षरग्राम पर समय समय पर छड़ेपन पर चर्चा होती रहती है। शादीशुदा लोगों के छड़ेपन के बारे में भी कभी कभी सुनने को मिल जाता है। इसी श्रृंखला में एक नया रत्न है महावीर शर्मा जी कि कुँवारा, पढ़िए व रस लीजिए। सुरेन्द्र शर्मा जी की तर्ज पर चार लाईनें महावीर शर्मा जी कि कविता […]
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Posted on मार्च 24th, 2005 द्वारा जीतेन्द्र
सावधान, ब्लागिये आ रहे है.
आइये आप भी पढिये ये लेख, “सावधान, ब्लागिये आ रहे है.”
डा. रति सक्सेना की कलम से लिखा यह लेख, हिन्दी चिट्ठाकारो के होली से सम्बंधित चिट्ठो पर है.हमारी तरफ से इस लेख के लिये डा.रति सक्सेना और अभिव्यक्ति की टीम को हार्दिक धन्यवाद.
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Posted on मार्च 22nd, 2005 द्वारा आशीष
अरे बन्धुओं, अपनी कलमें ज़रा तेज चलाइये। २५ तारीख पास आने वाली है और अभी तक केवल दो ही प्रविष्टियां आयी हैं। माना कि ३१ मार्च पास आने वाला है और आपमें से कुछ काफ़ी व्यस्त होंगे पर खुदी को कर बुलन्द इतना कि खुदा ही बता दे कि क्या लिखना है।
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