Posted on जून 30th, 2005 द्वारा अनूप
समय किसी के रोके नहीं रुकता । सो ३० तारीख आ पहुँची। यह समय सीमा थी-ग्याहरवीं अनुगूँज के समय की। जैसा कि पंकजजी ने बताया कि समय का फेर है यहाँ-वहाँ का सो मौका है अभी भी हाथ आजमाने का । ठेलुहे कलकत्ते में अड्डेबाजी कर रहे हैं। संपादक जुटे हैं किसी ग्राफिक को चिपकाने […]
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Posted on जून 25th, 2005 द्वारा अनूप
जैसा कि बताया गया था कि अनुगूँज में पोस्ट २५ जून तक लिखनी थी। काम भर की पोस्ट आ भी गईं हैं। पर जैसा कि रिवाज है पिछले कुछ समय का सो अनुगूँज की तारीख इस सप्ताहान्त तक बढ़ाई जा रही है ताकि जो अभी भी लिखना चाहे वे लिख सकें।सबसे अनुरोध है कि इस […]
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Posted on जून 20th, 2005 द्वारा पंकज
कहते हैं बोलने से पहले सोच लेना चाहिए। मेरे लिए होना चाहिए पढ़ लेना चाहिए। भईया अब की बार सरकार ने कमाल कर दिया। हिन्दी के दिन अंतर्जाल पर फिर गए। जरा देखिए कैसी मोहिनी छवि है नीचे - फांण्ट का नाम भी मोहिनी है। भाईयो अगले कुछ दिन तो इसी में ही गुजरेंगे।
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Posted on जून 20th, 2005 द्वारा पंकज
आज हिन्दी ब्लॉगमंडल व देसी अखबारें सरकार के हिन्दी फॉण्ट निकलाने के समाचारों से भरी पड़ी हैं। मैं भी जब से तमिल के भाग्य फिरे हैं से इसी ताक में था कि हिन्दी में ऐसा कब होगा। कब सरकार इसकी भी सुध लेगी। कल सबसे पहले विनय ने हिन्दी पर बताया कि ऐसा होने जा […]
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Posted on जून 16th, 2005 द्वारा आलोक
http://devanaagarii.net/ की टें बोली हुई है। पहली बार भेजा तो छपा ही नहीं, इसलिए फिर लिख रहा हूँ कि भाड़ा न देने की वजह से आतिथ्य बन्द हो गया है। ग़लती मेरी है, सोचा था कि औरों की तरह यह भी याददाश्त ताज़ा करने के लिए फ़रमान भेजेंगे लेकिन उन्होंने तो नौ दो ग्यारह ही […]
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