लो भाई बनारसी भी आ गये मैदान में

बीस साल बाद जब हमारे मित्र मनोज मिले तो बोले हम बदला चुकाने आये हैं। हमने पूछा -किस बात का बदला? तो वे बोले जो कवितायें तुमने अनजाने में हमें झेलाईं हम उनका बदला चुकायेंगे। हमने पूछा कि क्या वही कवितायें सुनाओगे? वे बोले नहीं-हम अपनी सुनायेंगे। हमने कहा -तुम कविता कब से लिखने लगे? […]

लाइवजर्नल पर धावा

लाइव जर्नल से लगभग सभी परिचित होंगे। लेखा और और लेखकों के समुदाय यहाँ अन्य प्रकाशन उपकरणों व स्थलों के मुकाबले काफ़ी सशक्त हैं। साथ ही, इस स्थल का पूरा स्रोत मुक्त है, आप चाहें तो अपने स्थल पर भी इसे चढ़ा सकते हैं, जैसा कि सराय वालों ने किया।
अब यह हिन्दी में भी […]

११ वीं अनुगूंज-माज़रा क्या है? का अवलोकन

जब से अनुगूँज का आयोजन शुरु हुआ, हम कई बार विषय देते-देते रह गये। हर बार यही डर रहा कहीं आयोजन करना ही न पड़ जाये।पर हमारे अच्छे कर्मों का प्रताप ही कहा जायेगा कि हम बाल-बाल बचते रहे। पर कब तक ! सो इस बार हमने सोचा बचने में वो मजा कहाँ जो फंसने […]